कार्यक्रम:बरसे झूम-झूम बदरा... पर मंत्रमुग्ध हुए श्रोता

मुंगेर2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
ठाकुरबाड़ी में भजन संध्या में मौजूद लोग - Dainik Bhaskar
ठाकुरबाड़ी में भजन संध्या में मौजूद लोग
  • श्रावण पूर्णिमा को लेकर ठाकुरबाड़ी और मंदिरों में उमड़ा जन-सैलाब

जिले के विभिन्न ठाकुरबाड़ियों और मंदिरों में श्रावण पूर्णिमा के मौके पर शुक्रवार की देर रात राधाकृष्ण के झूलन महोत्सव पर भक्त जनों का सैलाब उमड़ पड़ा। ऐसा लग रहा था मानो सामाजिक जीवन में व्याप्त कुरीतियों व कुठाराघात से निराश आम लोग भगवान श्रीकृष्ण की शरण में अपनी पीड़ा से मुक्ति के लिए बरबस ही चले आ रहे हैं। कौड़ा मैदान, बड़ी एवं छोटी संगत, गोपाल मंदिर, सावरिया मंदिर , सोझी घाट , बबुआ घाट, पूरबसराय, लाल दरवाजा, राम-जानकी मंदिर सहित बड़े और छोटे राजा की ठाकुरबाड़ियों में भजन संगीत समारोह का भव्य आयोजन किया गया। बेकापुर स्थित प्रेम मंदिर में आकर्षक व सुसज्जित झूलों को झुलाते हुए भक्तों ने भजन-किर्तन का देर रात तक आनंद उठाया। वहीं स्थिर चित्त वाले लगभग बारह बजे आरती के बाद प्रसाद ग्रहण कर घरों को वापस लौटे। सावन की वर्षा पर आधारित “सावन में बरसे बदरिया... गीत में जहां मिलन-विरह का जीवंत चित्रण संगीत शिक्षक अजय कुमार ने आह्लादक सुर में किया। वहीं कबीर दास के जीवन के यथार्थ की अभिव्यक्ति वाले भजन चलती चक्की देख के दिया कबीरा रोय, माटी कहे कुम्हार से, वहीं ब्रह्मदेव ठाकुर ने कक्षा भजन कल्याण तथा भैरवी राग से भक्ति की पूरी समा बांधी। प्रेम मंदिर में साहित्यकार मधुसूदन आत्मीय ने कहा कि श्रीकृष्ण सोलहों कला में निपुण थे, जबकि श्रीराम चार ही कला के ज्ञाता थे। कृष्ण का जीवन जन्म से मृत्युपर्यंत चमत्कारिक गुणों और घटनाओं से जुड़ा रहा, जबकि राम माता दुर्गा की शक्ति प्राप्त करने के बाद भी रावण से जीत नहीं पा रहे थे। उन्हें पाताल लोक के सहस्त्रबाहु ने युद्ध में अचेत कर दिया था तो लक्ष्मण मेघनाथ के तीरों के बाढ़ से मूर्छित हो गए थे। कृष्ण योगेश्वर कहलाए जबकि राम मर्यादा पुरुषोत्तम। अंत तक झूलन महोत्सव में शामिल लोगों ने भजनों के माध्यम से कृष्ण-महिमा को गुनते बुनते रहे। सेवायत शरद सिंह ने पुष्प अर्पित कर झूला डोलाया तो पुजारी मुन्ना महाराज ने महाआरती की। इस मौके पर मंजू देवी, सविता कुमारी, तुलसी देवी दर्जनों लोग मौजूद थे।

खबरें और भी हैं...