दर्दनाक घटना:पेट दर्द से चिखती रही महिला, एम्बुलेंस और ऑक्सीजन नहीं मिला, तड़पकर हुई मौत

मुंगेर15 दिन पहले
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सदर अस्पताल में हंगामा करते मृतक महिला के परिजन। - Dainik Bhaskar
सदर अस्पताल में हंगामा करते मृतक महिला के परिजन।
  • अस्पताल प्रबंधन के इच्छा शक्ति की कमी ने ले ली महिला की जान
  • ताजिया जुलूस में लगे दो एम्बुलेंस से को-आर्डिनेट कर बचाई जा सकती थी जान

वरीय पदाधिकारियों द्वारा सदर अस्पताल के विधि-व्यवस्था में सुधार को लेकर काफी कोशिश की जा रही है। परंतु अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों की मामूली चूक अक्सर मरीजों की मौत का सबब बनता देखा जाता है। ऐसी ही घटना सदर अस्पताल के महिला वार्ड में बीते शनिवार को देखने को मिली। हेरू दियारा निवासी सुबोध यादव की 30 वर्षीय मुन्नी देवी को पेट दर्द की शिकायत पर शनिवार रात 12 बजे सदर अस्पताल लाया गया। मुन्नी देवी उस वक्त पेट दर्द से काफी परेशान थी। वहीं इमरजेंसी वार्ड में तैनात चिकित्सक डॉ. निरंजन कुमार ने महिला का इलाज किया । जिसके बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। जब परिजनों ने एम्बुलेंस की मांग की तो पता चला एक एंबुलेंस पटना और एक भागलपुर गया है। वहीं दो एम्बुलेंस चेहल्लूम के तजिया जुलूस में होने के कारण उपलब्ध नहीं हो पाया। जिसके बाद चिकित्सक ने महिला को महिला वार्ड में भर्ती कर दिया गया। जहां रात लगभग 1:30 बजे उसकी मौत हो गयी। वहीं मुन्नी देवी की मौत के बाद परिजन चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मियों पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे।

महज एक बोतल स्लाइन चढ़ा छोड़ दिया: सुबोध
मृतिका के पति सुबोध यादव ने आरोप लगाते हुए कहा कि उसकी पत्नी का इलाज निजी चिकित्सक के यहां चल रहा था। शनिवार की रात दर्द ज्यादा होने पर मुन्नी देवी को लेकर सदर अस्पताल आया। जहां उसे केवल एक बोतल स्लाइन चढ़ा कर वार्ड में भर्ती कर दिया गया। जबकि वह काफी देर एम्बुलेंस भी खोजता रहा लेकिन एम्बुलेंस नहीं मिला। वहीं वार्ड में उसे नर्स द्वारा ऑक्सीजन तक नहीं लगाया गया। वो कई बार ऑक्सीजन लगाने की मिन्नत भी करता रहा मगर दर्द से तड़पती मुन्नी देवी को ऑक्सीजन भी नसीब नहीं हुआ और वो अस्पताल प्रबंधन की नाकामी की शिकार हो गई जिसके बाद उसने दम तोड़ दिया। एक एंबुलेंस पटना और एक भागलपुर गया था। वहीं दो एम्बुलेंस चेहल्लुम के तजिया जुलूस में एहतियातन लगाई गयी थी। अस्पताल प्रबंधन अगर चाहती तो तजिया जुलूस में व्यस्त दो एम्बुलेंस में से एक को आसानी से सदर अस्पताल वापस बुला सकती थी। लेकिन किसी ने इस पर घ्यान नहीं दिया जिसके कारण उसे बेहतर चिकित्सकीय सुविधा प्राप्त नहीं हो सकी और महिला की मौत हो गई।

अक्सर हंगामा होने पर कर दी जाती है मामले की लीपापोती
अपनों को खोने के बाद जब परिजनों द्वारा हंगामा किया जाता है तो उसे किसी प्रकार से समझा बुझाकर शांत कर वापस घर लौटने पर मजबूर कर दिया जाता है। वहीं जब गाहे-बगाहे कोई मामला तूल पकड़ लेता है तो मामले को निपटाने के लिए स्वास्थ कर्मी से स्पष्टीकरण और एक कमेटी का गठन होता है। चिकित्सक का स्पष्टीकरण और कमेटी द्वारा क्या सत्य और झूठ पाया गया ये फाईलों में दम तोड़ देती है। जिसके कारण न तो इंसाफ होता है और न ही संबंधित लापरवाह कर्मी पर ही कोई कार्रवाई होती है।

मरीज गैसपीन पर थी, हालत थी खराब : डॉ. निरंजन
शनिवार की रात इमरजेंसी वार्ड में तैनात चिकित्सक डॉ निरंजन ने बताया कि मरीज गैसपिन पर थी। उसकी हालत ज्यादा खराब थी। उसे रेफर भी किया गया था। लेकिन उस समय अस्पताल में एक भी एम्बुलेंस मौजूद नहीं था। जिसके बाद मरीज के पति के कहने पर ही उसे महिला वार्ड में भर्ती किया गया।

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