धूमधाम से की गई गोवर्धन पूजा:जियहू ए मोरे भइया, जिअ भइया लाख बरिस हो... गीत गाकर भाई को दी दुआएं

बगहा21 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • बगहा नगर सहित ग्रामीण इलाकों में धूमधाम से की गई गोवर्धन पूजा

नगर सहित ग्रामीण इलाकों में शनिवार को गोवर्धन पूजा के पारंपरिक गीत खूब गूंजे। जगह जगह महिलाओं का समूह गोवर्धन की पूजा में पूरे उत्साह के साथ जुटा रहा। इस अवसर पर महिलाओं व युवतियों ने अल्पना बनाया। परंपरा का पालन करते हुए पहले अपने अपने भाइयों को स्नेह भरा श्राप दिया, फिर जिस जीभ से भाई के लिए श्राप निकला उसमें कांट गड़ाकर प्रायश्चित किया तथा भाई के सुदीर्घ जीवन व भौजाई के सुख, सौभाग्य की कामना की। मान्यता है कि इसी दिन भगवान कृष्ण ने इंद्रदेव के अहंकार को चूर किया था।

पंडित जीवन पांडेय बताते हैं कि गोवर्धन पूजा करने के पीछे धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का अभिमान चूर करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर गोकुल वासियों की अतिवृष्टि से रक्षा की थी। माना जाता है कि इसके बाद भगवान कृष्ण ने स्वयं कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन छप्पन भोग बनाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का आदेश दिया था। तभी से गोवर्धन पूजा की प्रथा आजतक कायम है। गोवर्धन पूजा को लोग अन्नकूट पूजा के नाम से भी जानते हैं। इसके साथ ही वरुण, इंद्र और अग्निदेव की पूजा का भी विधान है।

खबरें और भी हैं...