गंडक में भी डॉल्फिन की मौजूदगी:देश के 80 फीसदी डॉल्फिन बिहार में पाई जाती हैं, VTR के पास गंडक नदी में भी मौजूदगी

बगहा21 दिन पहले
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गंडक में भी डॉल्फिन। - Dainik Bhaskar
गंडक में भी डॉल्फिन।

देश की 80 फीसद डॉल्फिन बिहार की नदियों में पाई जाती हैं। जिसमें गंडक भी एक है। यहां मिलने वाले घड़ियाल, मगरमच्छ, डॉल्फिन और कछुअे सहित अन्य कई प्रकार के जलीय जीव हैं। जो बड़ी संख्या में इस नदी में मौजूद हैं। इनके संरक्षण के लिए सरकार अब यह तैयारी कर रही है। पर्यावरण को संतुलित रखने के लिए जलीय जीवों का संरक्षण जरूरी है। इसके लिये संकटग्रस्त जीवों को चिह्नित कर पोषण क्षेत्र विकसित करने के साथ उनकी निगरानी की जा रही।

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व प्रशासन ने भी ऐसे जीवों को संरक्षित करने की पहल शुरू की है। यदि इनके संरक्षण व संवर्धन पर बल दिया जाए तो यह क्षेत्र उनके अधिवास के लिए उत्तम स्थल बन जाएगा। वीटीआर वन संरक्षक हेमकांत राय ने बताया कि गंगा नदी में जो डॉल्फिन पाई जाती है वही डॉल्फिन गंडक नदी में भी पाई जाती है ।

गंडक नदी का क्षेत्र डॉल्फिन के अधिवास के लिए अनुकूल है। उन्होंने बताया कि बाल्मीकि नगर से लेकर सोनपुर तक 20 17 - 18 में डॉल्फिन पर स्टडी कराया गया था। डॉल्फिन संरक्षण के दिशा में बिहार सरकार लगातार काम कर रही है। इसके लिए पटना में रिसर्च इंस्टीट्यूट बनाया गया है । गंडक का पानी दूसरी नदियों की तुलना में अधिक साफ है । जिसके कारण इसमें घडियाल, मगरमच्छ, डॉल्फिन और कछुअे वगैरह बढ़ते ही जा रहे हैं ।

2017 - 18 में हुआ था सर्वे
वन संरक्षक हेमकांत राय ने बताया कि डॉल्फिन के आंकड़ों के बारे में जानकारी लेने के लिए वाल्मीकि नगर से सोनपुर तक 2017-18 में सर्वे का काम कराया गया था। इस दौरान 155 से 160 के करीब में डॉल्फिन की संख्या निकल कर सामने आई । VTR डॉल्फिन की मौजूदगी के चलते इसके संरक्षण के लिए नदी में वैसे विस्तृत जलीय इलाके की तलाश की जा रही है, जहां कम से कम बाहरी रुकावट हो। इसके संरक्षण क्षेत्र से गांव काफी दूर हो और यहां किसी तरह का बाहरी हस्तक्षेप नहीं रहे।

क्या है डॉल्फिन
ह्वेल मछली की तरह स्तनधारी जलीव जीव है। यह बेहद आकर्षक देखने वाली होती है। यह पानी में 990 फीट गहराई तक जा सकती है और पानी से 20 फीट उपर तक उछल सकती है। दुर्लभ जलीय जीव की श्रेणी में आने के बाद इसके संरक्षण पर काम होने लगा है। हालांकि डॉल्फिन को ज्यादा डर नदी तट पर बसे मछुआरों से है। जिनके जालो में डॉल्फिन आ जाती हैं। इन्हें सुरक्षित करने के लिए लोगों के अंदर जागरूकता फैलाने की भी आवश्यकता है।