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किसानों के अरमान पर फिरा पानी:बारिश से फसलों को भारी नुकसान, पौधा सूखने से टूट कर गिर रहे टमाटर

बंजरिया19 दिन पहले
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बारिश के बाद सूखे टमाटर के पौधे। - Dainik Bhaskar
बारिश के बाद सूखे टमाटर के पौधे।
  • चैलाहा में तीन बीघे में की गई थी टमाटर की खेती, चक्रवात तूफान के साथ आई हुई थी चार दिनों तक बारिश, सब्जी की फसल को हुआ है भारी नुकसान

यास चक्रवात तूफान के साथ हुई तेज बारिश के बाद चैलाहा में लगे टमाटर के पौधे सुख रहे है। जिससे टमाटर सुख कर जमीन पर गिर रहे है। गिरते टमाटर के साथ किसानों के चेहरे मुरझाने लगे हैं। किसान बच्चा साह ने बताया कि टमाटर के सूखने पेड़ से लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।

उन्होंने बताया कि एक बीघा जमीन हुंडा लेकर टमाटर लगाया था। जिसके के लिए एक लाख साठ हजार रुपये किलो के हिसाब से दो सौ ग्राम बीज लिया था। खेत की जुताई, खाद, बीज, पानी, मचान बनवाया। परन्तु चक्रवातीय तूफान के साथ आई बारिश सपनों पर पानी फेर दिया। किसान खेदू भगत बताते है कि हमने इसे मार्च में लगाया था। जो अगस्त तक फल देता। परन्तु अब गिरते टमाटर को उठाना मुश्किल हो गया है। गिरने वाला टमाटर सुख रहा है। जो किसी काम का नही है।

इन लोगो ने कहा कि पूंजी निकलना मुश्किल हो गया। यह टमाटर की ऐसी नस्ल है जिसके पेड़ नही होते इसकी लता होती है। साथ ही इसकी अच्छी पैदावार होती है। किसानों ने बताया कि इस वर्ष लॉकडाउन के कारण यूपी, बिहार के अन्य जिलों के साथ नेपाल के व्यापारी नही आये। जिससे टमाटर के भाव नही मिल रहे थे। कई किसानों ने तो टमाटर नही तोड़ रहे थे। इधर दस दिनों से टमाटर के भाव मिलने शुरू हुए थे। तब तक किसानों की रही सही कसर बारिश ने पूरी कर दी।

3 बीघा जमीन में टमाटर की खेती की गई थी

किसानों का कहना है कि जिस तरह राज्य सरकार धान, व गेहूं के उत्पादन करने वाले किसानों को मुआवजा देती है। उसी तरह सब्जी उत्पादन करने वाले किसानों को भी फसल क्षतिपूर्ति व मुआवजा दे। ताकि सब्जी उत्पादक किसानों का सहयोग हो सके। उनके घाटे को थोड़ा कम किया जा सके। बताते चले कि चैलाहा में लगभग 3 बीघा जमीन में टमाटर की खेती की गई थी। जिन्होंने साहूकार से व्याज लेकर खेती की थी। उनके सामने व्याज तक देने की स्थिति नही है। प्रखंड कृषि पदाधिकारी बिक्रमा माझी ने बताया कि ऐसी स्थिति में सब्जी उत्पादकों को जिला उद्यान विभाग से अनुदान मिलता है। इसके लिए किसान प्रखंड कृषि कार्यालय में आवेदन देंगे। जिसकी जांच कृषि सलाहकार व कृषि समन्यवक द्वारा कराई जायेगी। साथ ही इसकी रिपोर्ट जिला उद्यान पदाधिकारी के यहां भेज दिया जाएगा। उद्यान विभाग ही नुकसान की रिपोर्ट के आधार पर अनुदान देती है।

नुकसान की रिपोर्ट भेजी जाएगी : सीओ

उप मुखिया नंदकिशोर दुबे व मुखिया प्रतिमा कुमारी ने राज्य सरकार व जिला प्रशासन से मांग की है कि उनके खेतों का निरीक्षण करवा कर उन्हें अनुदान देकर राहत दी जाए। हम उनके खून पसीने की मेहनत का भरपाई तो नही कर सकते परन्तु कुछ आर्थिक सहयोग कर कम करने का प्रयास तो कर सकते है। यही हमारे अन्नदाता है यही हमारी थालियों में हरी सब्जियों के प्रकार को उपलब्ध कराते है। जबकि सीओ मणि कुमार वर्मा ने कहा कि आपदा से देने का प्रावधान है परन्तु उसकी रिपोर्ट ससमय बना कर कृषि कार्यालय को भेजनी पड़ती है।

मैं क्षेत्र के राजस्व कर्मी को भेज कर हुए नुकसान का रिपोर्ट बनाने को कहूंगा। साथ ही नुकसान की सूचना प्रखंड कृषि पदाधिकारी को दूंगा। समाजसेवी व किसान उमेश सिंह चौहान ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण ही किसान 6 माह से सड़कों पर है। सरकार को कृषि नीति में बदलाव कर किसान हित में बनाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवात तूफान यास के कारण जिले में तीन दिनों तक मूसलाधार बारिश हुई थी। इस कारण किसानों के खेत में पानी भर गया था। पानी भरने के कारण खेतों में लगी सब्जी और टमाटर की फसल के पौधे पूरी तरह से डूब गए थे। अब खेतों से पानी तो कम हो गया लेकिन टमाटर और सब्जी की फसल बर्बाद हो गई।

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