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यास का असर:बेमौसम बारिश से सब्जी की फसलें गली, जो बचीं उनकी उपज घटी

बथनाहा20 दिन पहले
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मिर्ची की फसल को दिखलाते किसान सुरेश ठाकुर। - Dainik Bhaskar
मिर्ची की फसल को दिखलाते किसान सुरेश ठाकुर।
  • बथनाहा, फुलकाहा, नरपतगंज और आसपास के क्षेत्रों में 150-200 एकड़ में उगाई जाती हैं सब्जियां; नेपाल बंद होने के कारण भी किसान प्रभावित, वहां के बाजार में मिलती थी बेहतर कीमत, अब फारबिसगंज मंडी में थोक में उपज बेच रहे

यास तूफान के कारण बारिश से खेतों में लगी हरी सब्जियों को काफी नुकसान हुआ है। सीमावर्ती क्षेत्र के किसानों ने खीरा, कद्दू, कदीमा, करेला, बोडी, मिर्ची, झींगा आदि हरी सब्जियां बड़े पैमाने पर लगाई, लेकिन 4 दिनों से हो रही बारिश ने किसानों के कमर तोड़ दी है। श्यामनगर, सोनापुर, चकोडवा, बथनाहा,भंगही, भोड़हर, पोसदहा, पुलहा, नवाबगंज आदि गांवों के किसान मुख्य रूप से हरी सब्जियों के खेती पर निर्भर हैं। हरी सब्जियों की खेती से होने वाले आय से ही किसान परिवारों का भरण-पोषण के साथ बच्चों की पढ़ाई, बेटी की शादी तक निर्भर होते हैं। बारिश होने से खेतों में लगी फसल को जहां नुकसान हुआ है, वहीं अब सब्जियों के सूखने का भी खतरा मंडराने लगा है। हरी सब्जियों के फसल को उपजाने के लिए जहां किसान ऊंची जमीन की तलाश करते हैं, वहीं हरी सब्जी के लिए 30-35 डिग्री तापमान को अनुकूल माना जाता है। अधिक तापमान बढ़ने से पौधों में फसल नहीं लगती है तो अधिक बारिश होने से पौधा भी सूखने लगता है।

एक एकड़ में 40-50 हजार रुपए की लागत
किसान प्रदीप मेहता, पंकज मंडल, रविन्द्र ठाकुर, सूरज मेहता, सुरेंद्र ठाकुर, बिनोद मंडल, राजन मंडल, हेमनारायण ठाकुर, दीपक सिंह, सीताराम मंडल आदि ने कहा कि हरी सब्जियों की फसल को लगाने में प्रति एकड़ में 40 से 50 हजार रुपए तक की लागत आती है। उसमें खेतों का जोत, रसायनिक खाद, कम्पोस्ट खाद, बीज, समय-समय पर कीटनाशक का छिड़काव, पटवन केरोनी आदि शामिल हैं। एक एकड़ में लगे करेला की फसल को दो दिन के अंतराल के बाद चार से पांच क्विंटल की हरी सब्जियों का उपज होता है। जबकि बोडी एक से दो क्विंटल का उपज दो दिनों के अंतराल पर होता है। इसी क्रम से खीरा, मिर्ची, झींगा, कद्दू, कदीमा आदि हरी सब्जी की उपज होती है, लेकिन अधिक बारिश होने से हरी सब्जियों की उपज कम होने लगी है। बारिश होने से फसल में फफूंदी कीड़े लगने लगे हैं। किसान कहते हैं कि अब लागत पूंजी का निकल पाना भी मुश्किल है।

पीड़ित किसान बोले- कम कीमत पर बेचनी पड़ रही फसल, नुकसान बढ़ा
बथनाहा, फुलकाहा, नरपतगंज थाना क्षेत्र के साथ आसपास के क्षेत्रों में 150-200 एकड़ में हरी सब्जियों का खेती किसानों द्वारा की जाती है। सब्जियों को किसान फारबिसगंज की मंडी में थोक में बेचते हैं। खीरा 10 रुपए, करेला 15-20 रुपए, बोडी 25-30 रुपए, मिर्ची 35-40 रुपए, झींगा 25-30 रुपए बेचा जाता है। किसान रविंद्र ठाकुर कहते हैं कि कोरोना के कारण नेपाल बंद रहने से हरी सब्जियों का सही कीमत नहीं मिल पा रही है। किसान नेपाल के बिराटनगर, इटहरी, दुहबी आदि जगहों तक पहले हरी सब्जियों को बेचने जाया करते थे। जहां उन्हें अच्छा खासा कीमत मिल जाती थी, लेकिन नेपाल बंद होने से मजबूरी में फारबिसगंज की मंडियों व बथनाहा के हाट में ही हरी सब्जियों को कम कीमत पर बेचना पड़ रहा है।

40 वर्षों से इन क्षेत्रों के किसान उपजा रहे सब्जियां

जानकार बताते हैं कि 1976 में हाजीपुर से दो बीज विक्रेता श्यामनगर के किसान रामकिशुन ठाकुर के घर पर महीनों रह करके फूल गोभी, बंधा गोभी व करेले की फसल को लगाने के लिए प्रेरित किया था। बीज उपलब्ध कराकर खेतों में उपजाने की विधि भी बताई थी, तब से इस क्षेत्र के किसान लगातार हरी सब्जियों की खेती करते चले आ रहे हैं। इस क्षेत्र में गोभी की खेती भी बड़े पैमाने पर भी की जाती है। अभी भी इस क्षेत्र के कई किसान हाजीपुर से ही बीज मंगवाते हैं।

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