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बैंक बदलकर घपलेबाजी:जिस बैंक में मजदूरों का खाता, उस बैंक में पैसा नहीं भेज दूसरे के खाते में राशि भेज की निकासी

बथनाहा13 दिन पहले
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  • मनरेगा में अनियमितता, काम कराने के बाद भी नहीं मिला मजदूरों को योजनाओं का लाभ
  • मजदूरों के वास्तविक खाते में राशि नहीं भेज दूसरे के खाते में भेज रहे पैसा

भंगही पंचायत में मनरेगा योजना में वित्तीय अनियमितता का मामला परत दर परत खुलने लगा है। योजना के अंतर्गत पौधरोपण, मिट्टी भराई, सड़क निर्माण, गृह निर्माण कार्य में लगे मजदूरों की राशि मजदूरों के वास्तविक खाते में न भेजकर दूसरे व्यक्तियों के खाते में भेजे जाने का एक और मामला सामने आया है। ताजा उदाहरण सुगनदेव बैठा का है, जिसका खाता एसबीआई में है, लेकिन इसका पैसा यूको बैंक में भेज दिया गया, जहां लाभुक का खाता ही नहीं है। इंदिरा आवास योजना व प्रधानमंत्री आवास योजना में मजदूरी की राशि लाभुक को पांच वर्षों के बाद भी अब तक नहीं मिल पाया है, जबकि जॉबकार्ड नंबर को मोबाइल पर सर्च करने के बाद देखा गया कि राशि लाभुक के खाते में राशि भेज दी गई है। बैंक में खाता अपटूडेट करने के बाद पता चला कि मजदूरी की राशि लाभुक के खाते की जगह किसी अन्य के खाते में हस्तांतरित कर दी गई है। एक अन्य लाभुक का खाता एसबीआई मे हैं, लेकिन पैसा सेंट्रल बैंक में भेज दिया गया। भंगही पंचायत श्यामनगर वार्ड संख्या-15 निवासी सुगनदेव बैठा व डोमी बैठा व अन्य लोगों को मनरेगा योजना के तहत पौधा लगाया, लेकिन आधी अधूरी राशि मिली व शेष मनरेगा योजना के तहत मिलने वाली निर्धारित मजदूरी व अन्य राशि का भुगतान अबतक नहीं हो पाया है।

किसी किसान या वनपाल को अबतक पूर्ण राशि का भुगतान नहीं किया गया
महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत 200 के लगभग पौधा लगाने के लिए प्रोत्साहन राशि 1.50 लाख रुपए मिलता था। पौधरोपण का कार्य पंचायत के अलग-अलग स्थानों में किया गया था। इसमें विभिन्न प्रजातियों के 200 के लगभग पौधा लगाने के लिए किसानों को आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया था तो वहीं इस योजना के तहत उन्हें एक वनपाल को 177 रुपया के दर से दैनिक मजदूरी का भुगतान पांच वर्षों तक किए जाने का प्रावधान है, जबकि जमीन मालिक को 200 पौधा लगाने के लिए 61,195 रुपया व एक चापाकल लगाने की राशि भुगतान करने का नियम है। मनरेगा योजना अंतर्गत भी किसी किसान या वनपाल को अबतक पूर्ण राशि का भुगतान नहीं किया गया है। जो भी राशि खाता में भेजी गई, उसमें भी हेराफेरी कर राशि का उठाव बिचौलियों द्वारा कर लिया गया।

मुखिया की बिना सहमति स्वीकृति व राशि की निकासी
भंगही पंचायत के मुखिया व पीओ साहब की लापरवाही से इस तरह का अनियमितता हुवा है । मेरी सहमति के बिना ही कई योजनाओं की स्वीकृति भी दी गई व राशि भी निकाली गई है। बिन्देश्वर राम ,पीआरएस , ग्राम पंचायत राज भंगही।

एक ही मजदूर के जॉबकार्ड में दो अलग-अलग बैंक का नाम
लाभुक सुगनदेव बैठा के दो अलग-अलग बैंक खाता में राशि भेजने का उल्लेख किया गया है। जॉब कार्ड के मुताबिक पहले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया तो दूसरे में यूको बैंक दिखाया जा रहा है। दोनों ही बैंक खातों में बड़े ही चतुराई व सफाई से सेम डेट व सेम राशि का हस्तांतरण किया गया है। दो अलग-अलग बैंक खाता में भेजी गई राशि को देखकर सुगनदेव बैठा मनरेगा कार्यालय नरपतगंज पहुंचे, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। शाहिस्ता खातून पति रफीक आलम दोनों पति-पत्नी ने सड़क निर्माण में मजदूरी का काम किया था। मजदूरी राशि उसके स्टेट बैंक एकाउंट भंगही शाखा में भेजने का उल्लेख किया गया है, लेकिन उसी के नाम पर बाद में सेंट्रल बैंक में भेजने का उल्लेख मिलता है। शाहिस्ता खातून व रफीक आलम कहते है कि हमलोगों का ज्वाइंट खाता स्टेट बैंक में है न कि सेंट्रल बैंक में। इन्हें भी मजदूरी नहीं मिली है।

वित्तीय अनियमितता की जानकारी हमें नहीं
पीआरएस द्वारा विगत एक वर्ष से मास्टररोल में पेमेंट एडवाइस पर हस्ताक्षर नहीं करवाया जाता है। इसलिए किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता की जानकारी हमें नहीं है।
अजय साह ,मुखिया प्रतिनिधि ग्राम पंचायत राज भंगही।
जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी का गठन
दो सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया है। इसमें पीटीएस निरंजन व योगेन्द्र पासवान को जांच कर प्रतिवेदन समर्पित करने का निर्देश दिया गया है। जांचोपरांत दोषियों
पर करवाई की जाएगी। इस जांच टीम से मनरेगा पीआरएस को
अलग रखा गया है।
-प्रमोद प्रियदर्शी,पीओ मनरेगा, नरपतगंज।

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