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नवरात्रि:अंकुरित भगवती स्थान से खाली हाथ नहीं लाैटते भक्त

बेनीपट्टीएक महीने पहले
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  • यहां अष्टमी और नवमी तिथि को श्रद्धालुओं द्वारा छाग की बली प्रदान की जाती है

जनक जी के भाई कुशध्वज की राजधानी रहे बेनीपट्टी प्रखंड के अकौर गांव स्थित अंकुरित भगवती की पूजा प्राचीन काल से ही की जाती है। अंकुरित अकौर भगवती सैकड़ों वर्ष पूर्व फूस फिर खपरैल और अब विशाल मंदिर भवन में स्थापित हैं। कुल सोलह कट्ठे जमीन की रकवा वाले मंदिर परिसर में अंकुरित भगवती के अलावे सात फीट की भगवान विष्णु की कलात्मक प्रतिमा, लक्ष्मीनारायण, सीताराम, भगवान सूर्य, नागदेवता, विराट रूप की प्रतिमा सहित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा स्थापित है।

पिंडस्वरूपा भगवती की कलात्मक प्रतिमा को छोड़कर उक्त सभी देवी–देवताओं की मूर्तियां गांव स्थित विभिन्न ताल-तलैयों से मिली हुई हैं। इस भगवती के स्थान परिवर्तन के बारे में कहा जाता है कि जहां भगवती अंकुरित हुईं थीं उस जगह से मंदिर परिसर में ही दूसरी जगह भगवती की स्थान परिवर्तन की कोशिश की गई। लेकिन, बहुत जमीन खुदाई के बाद भी जमीन के कितने भीतर भगवती अंकुरित हुईं यह पता नहीं चल सका।

बेनीपट्टी प्रखंड व अनुमंडल मुख्यालय से तकरीबन सात किलोमीटर की दूरी पर बेनीपट्टी-बासोपट्टी सड़क किनारे अकौर स्थित अंकुरित भगवती स्थान के झलक पड़ने मात्र से लोगों को सुख, शांति और समृद्धि की अनुभूति होती है। वैसे तो सालों भर लेकिन, दशहरा में मंदिर व परिसर का दृश्य पूजा-अर्चना, दीपमाला, भजन कीर्तन, आरती, श्रीमद् देवी भागवत कथा वाचन एवं श्रद्धालुओं की अप्रत्याशित भीड़ से मनोरम बनता है। स्थानीय सहित बाहरी श्रद्धालुओं की भीड़ भी यहां दुर्गा पूजा के दौरान जुटती है।

अकौर के ग्रामीणों ने बताया कि दिव्य एवं अनोखी छटा से लबरेज इस भगवती स्थान को सरकार से पर्यटन स्थल का दर्जा मिलना आवश्यक है। चूंकि, यहां मंदिर परिसर में भगवती सहित अन्य देवी-देवताओं की अमूल्य मूर्तियां विधमान हैं। यह भगवती स्थान भारत के एकावनवें सिद्धपीठों में भी शुमार है।इसकी सुंदरता भी प्राकृतिक छटा बिखेर रही है। गांव में कुल अस्सी तालाब स्थित है जो जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। दुर्गा पूजा कमेटी के अनुसार, वैसे तो सालों भर यहां भगवती को छाग बली देने की प्रथा है।

लेकिन, दुर्गा पूजा की अष्टमी व नवमी तिथि को हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं द्वारा भगवती को छाग बली प्रदान की जाती है। दुर्गा पूजा की सफलता केलिए दो सौ लोगों की कमेटी बनाई गई है। सभी सदस्य और अकौर के समस्त ग्रामीणों के सहयोग से पूजा में होने वाले खर्च के रुपए वहन किए जाते हैं। इस वार भी चार से पांच लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है। मंदिर परिसर में श्रीमद् देवी भागवत कथा वाचन की व्यवस्था कलश स्थापन से लेकर विजयादशमी तक केलिए रहती है।

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