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अब भी हजारों लोग फंसे हैं:नौतन की 3 पंचायतों के 13 गांवों के 6400 लोग प्रभावित दो दिनों में 500 पीड़ितों ने बांध और सड़क पर ली शरण

कृष्णकांत मिश्र |भगवानपुर दियारा, नौतनएक महीने पहले
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पानी में डूबा नौतन का शिवराजपुर छरकी गांव। - Dainik Bhaskar
पानी में डूबा नौतन का शिवराजपुर छरकी गांव।
  • भगवानपुर पंचायत के सभी घराें में घुसा है 4 से 5 फीट पानी, नहीं पहुंची प्रशासनिक राहत

नारायणी का जल स्तर अब निचले मैदानी व दियारा के इलाके में पहुंच चुका है। इसकी वजह से चंपारण तटबंध के उस पार रहने वाले नौतन प्रखंड के शिवराजपुर, भगवानपुर एवं मंगलपुर काला के 13 गांवों के सैकड़ों घरों में पानी समा गया है। इससे तीनों पंचायत की करीब 64 सौ आबादी प्रभावित है। गुरुवार से लेकर शुक्रवार दोपहर तक मंगलपुर-यादोपुर एवं चंपारण तटबंध पर करीब 500 लोग शरण ले चुके है। लेकिन अब भी हजारों लोग बाढ़ के पानी में फंसे हुए है। सबके घरों में 4-5 फीट पानी समाया हुआ है। स्थानीय लोग किसी प्रकार नाव का प्रबंध कर उंचे स्थानों पर पहुंच रहे है, लेकिन प्रशासन की ओर से अबतक इन लोगों के लिए व्यवस्था नहीं की जा सकी है।
भगवानपुर में छप्पर तक पहुंचा पानी
भगवानपुर के नवकाटोला विशंभरपुर निवासी गया चौधरी, शंभू मांझी, देवदत राम ने बताया कि भगवानपुर पुरा का पुरा पंचायत बाढ़ की चपेट में है। कही 4-5 फीट पानी है तो कही पानी छप्पर तक पहुंच चुका है। नाव से करीब 50 घरों के करीब 300 लोग गांव छोड़कर चंपारण तटबंध पर पहुंचे हुए है। पंचायत में करीब 4000 लोग है। जिसमें अब भी हजारों लोग फंसे हुए हैं।

नाव से बाहर निकाले जा रहे हैं बाढ़ पीड़ित लोग

मंगलपुर-यादोपुर मुख्य सड़क के किनारे पहुंचे मंगलपुर काला पंचायत के लालबाबू यादव, परमजीत यादव, धर्मेद्र यादव, किशोरी यादव ने बताया कि दस साल पहले बाढ़ की वजह से ही वे लोग भगवानपुर से आकर मंगलपुर काला पंचायत में बस गए। लेकिन यहां भी स्थिति वैसी ही है। भगवानपुर, मंगलपुर काला एवं शिवराजपुर पंचायत के कई गांवों में बाढ़ में फंसे लोगों को नाव से लगातार ढोया जा रहा है। पीड़ितों ने बताया कि नाव की भी क्षमता है। इसलिए जो पहले जरुरी है उसे बाहर निकाला जा रहा है। इसके बाद एक-एक कर सभी लोगों को निकाला जाएगा। अब भी हजारों लोग बाढ़ में फंसे हुए हैं।

हर साल चंपारण तटबंध ही बनता है सहारा
दियारा के बाढ़ पीड़ितों के लिए हर साल चंपारण तटबंध बड़ा सहारा बनता है। एक तो इस तटबंध की वजह से गंडक के बाढ़ का पानी मैदानी भागों में नहीं आता। दूसरा यह कि जब गंडक व बारिश के पानी से दियारा के लोग घिर जाते है तो तटबंध ही तीन माह तक के लिए सहारा बनता है। जहां आकर लोग अस्थायी आशियाना बनाकर गुजर बसर करते है। ग्रामीणों ने बताया कि यह तटबंध अगर नहीं होता तो उन्हें कही शरण नहीं मिलता और दियारा के लोगों को और अधिक परेशानी झेलनी पड़ती।

कई जगहों पर रिस रहा तटबंध, कई जगह कटाव, ठीक से नहीं हुआ एंटीरोजन कार्य

1766 में बेतिया महाराज युगल किशोर सिंह को परास्त करने के बाद अंग्रेजी हुकूमत ने अधूरे चंपारण तटबंध को पूरा करने का काम किया। इसमें 35940 रुपए की लागत आई थी। जिसे तटवर्ती गांवों से वसूल किया गया था। इसके बाद समय समय पर चंपारण तटबंध की मरम्मत होती रही। अभी चंपारण तटबंध में मंगलपुर से शिवराजपुर के बीच कई जगहों पर कटाव हो चुका है तो एक जगह तटबंध रिस भी रहा है। जहां तटबंध पर कटाव हो रहा है वहां प्रशासन ने एंटीरोजन कार्य के लिए दो दिन पहले बैग में बालू भरकर गिराया है। वहीं, शुक्रवार को गंडक बराज से शाम 8 बजे 1.42 लाख क्यूसेक और 9 बजे 1.47 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।

रजवाई में भी घुसा पानी सड़क पर लिया शरण

नौतन के दक्षिण तेल्हुआ, मंगलपुर काला, सिरनी मलाही आदि के कई परिवार गोपालगंज क्षेत्र के रजवाई गांव में अपना घर बनाकर रह रहे है। गंडक का पानी वहां भी समा गया है। जिसकी वजह से ये लोग मंगलपुर - यादोपुर मुख्य सड़क पर गंडक नदी में बने पुल के इस पार प्लास्टिक तानकर शरण लिए हुए है। सड़क पर शरण लिए अमानत मियां, रहीम मियां, शकीला बेगम, पान मोहम्मद मियां ने बताया कि दो तीन साल पहले बाढ़ की वजह से यहां आकर बसे। अब यहां भी बाढ़ का कहर जारी है तो सड़क पर शरण लिए हैं।

पानी घटने पर चलेगा सामुदायिक किचन

बाढ़ का दंश झेल रहे ग्रामीण पानी को लगातार बढ़ता हुआ बता रहे हैं, वहीं नौतन सीओ भास्कर पानी को घटता हुआ बता रहे है। सीओ भास्कर ने बताया कि अभी पानी घटने की स्थिति में है। जैसे ही पानी बढ़ता है उसी समय सामुदायिक किचन चालू कर दिया जाएगा। अभी जिला से प्लास्टिक उपलब्ध नहीं हो पाया है। जैसे ही प्लास्टिक उपलब्ध होगा पीड़ितों को दिया जाएगा। डीएम कुंदन कुमार ने कहा है कि सभी सीओ को सुरक्षित जगहों पर लाने का निर्देश दिया गया है। फंसे लोगों को हर हाल में निकाला जाएगा।

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