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पहल:थरूहट की कलाकृतियों को डिजिटल प्लेटफाॅर्म से देशभर में मिलेगी पहचान

बेतिया12 दिन पहले
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  • थारू जनजाति की महिलाओं में क्षमता संवर्धन, कौशल विकास व रोजगार सृजन से आएगी खुशहाली : डीएम

थरूहट की कलाकृतियों को देश व विदेश में पहचान मिले, इसको लेकर जिला प्रशासन की ओर से कवायद शुरू कर दी गई है। जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने कहा कि इसके लिए डिजिटल प्लेटफाॅर्म तैयार की जायेगी। इस दिशा में सभी को प्रयास करना होगा। आज इस मंच से एक नयी शुरूआत की जा रही है, जिससे थारू जनजाति के लोगों खासकर महिलाओं में क्षमता संवर्धन, कौशल विकास एवं स्वरोजगार का सृजन होगा। उनकी जिंदगी में खुशहाली आएगी। उन्होंने कहा कि थरूहट की कलाओं को निखारने की आवश्यकता है ताकि सदियों से चली आ रही इन सांस्कृतिक कलाओं को संरक्षित करते हुए इनका विकास किया जा सके। सभी को समन्वित प्रयास करके थरूहट की कला को बुलंदियों तक पहुंचाना है। सदियों से चली आ रही इन कलाओं का सम्मान होना चाहिए। रविवार को जिला निबंधन एवं परामर्श केन्द्र के प्रांगण में वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वाधान में हस्तशिल्प सेवा केन्द्र, मधुबनी द्वारा आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए डीएम ने कही। उन्होंने कहा कि थरूहट के शिल्पकारों को प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है ताकि ये और अधिक आधुनिकता के मिश्रण के साथ अपने उत्पादों का प्रोडक्शन कर सके। साथ ही इन्हें ऑनलाइन मार्केटिंग के लिए फोटो अपलोड करना, पोर्टल ओपन करना आदि की भी विधिवत जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े।

हस्तशिल्प सेवा केंद्र की ओर से सेमिनार का किया गया आयोजन

33 शिल्पकारों में वस्त्र मंत्रालय का आइडेंटी कार्ड का वितरण

जिलाधिकारी द्वारा अनुसूचित जनजाति समुदाय के कुल 33 शिल्पकारों के बीच वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्गत आर्टिजन आइडेंटी कार्ड का वितरण किया गया। आर्टिजन आइडेंटी कार्ड से शिल्पकारों को अनेक सुविधाएं प्राप्त होंगी तथा वे अपने उत्पाद को राष्ट्रीय स्तर तक भी बिक्री कर पाएंगे। सहायक निदेशक कुमार ने बताया कि पहचान कार्ड के माध्यम से शिल्पकारों को प्रशिक्षण लेने में सहूलियत मिलेगी।

60 वर्ष तक कार्य करने करने वाले को 3500 प्रतिमाह पेंशन

बताया कि बेहतर कार्य करने वाले वैसे शिल्पकार जिन्हें बिहार सरकार एवं भारत सरकार द्वारा पुरस्कृत किया जाता है, उन्हें 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने के उपरांत 3500 रुपए प्रतिमाह पेंशन दिये जाने का भी प्रावधान है। साथ ही बीमा की भी व्यवस्था की गयी है। कार्यशाला में विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा ऑनलाइन मार्केटिंग, जेम रजिस्ट्रेशन, डिजाइन का विकास, मुद्रा योजना आदि की जानकारी दी गई।

योजनाओं से परिचित कराना है मुख्य उद्देश्य

कार्यालय विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) के सहायक निदेशक मुकेश कुमार ने बताया कि वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार अंतर्गत इस कार्यालय का उद्देश्य है कि यहां के आदिवासी शिल्पकारों को विभिन्न योजनाओं से परिचित कराया जाए ताकि उनको योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि दस्तकार सशक्तीकरण योजना अंतर्गत सर्वे उपरांत स्वयं सहायता समूह का गठन किया जाता है। चिह्नित शिल्पकारों का बैंक खाता, पहचान कार्ड, आदि से संबंधित कार्य किया जाता है। क्लस्टर का नियमित देखभाल, उनकी आवश्यकताओं का आकलन आदि के लिए हस्तशिल्प सेवा केन्द्र एवं इंप्लीमेंटिंग एजेंसी समय-समय पर क्लस्टर का निरीक्षण करती है। संबंधित एजेंसी क्लस्टर का डीपीआर बनाकर आवश्यक इंटरवेंशन हेतु प्रस्ताव भेजती है।

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