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नीतीश जी, गांधीजी को चंपारण लानेवाले का गांव बह गया:पंडई नदी में उफान से राजकुमार शुक्ल के गांव 'मुरली भरहवा' के 30 घर बाढ़ में बहे, लगातार दूसरे साल आई तबाही

बेतिया24 दिन पहले
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बाढ़ के पानी में डूबता मुरली भरहवा गांव का एक घर। - Dainik Bhaskar
बाढ़ के पानी में डूबता मुरली भरहवा गांव का एक घर।

बेतिया में लगातार दूसरी बार बाढ़ के कारण चंपारण सत्याग्रह के प्रणेता और स्वतंत्रता सेनानी राजकुमार शुक्ल का 'मुरली भरहवा' गांव डूब गया है। पंडई नदी में उफान के कारण गांव के 30 घर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। 250 घरों वाले इस गांव की कुल आबादी 1300 के करीब है। सभी पर खतरा मंडरा रहा है।

लोग किसी तरह अपने घरों से निकलकर पलायन कर रहे हैं। यहां सीने तक पानी है। इस गांव के लिए यह तबाही नई नहीं है। पिछले साल भी बाढ़ में ऐसा ही हुआ था। इससे पहले वर्ष 2017 में भी बाढ़ से गांव तबाह हो चुका है।

गांव में बने स्मारक तक पानी में डूबे। इनमें पंडित राजकुमार शुक्ल और संत राउत की प्रतिमाएं हैं, जिनको CM नीतीश कुमार ने लगवाया था।
गांव में बने स्मारक तक पानी में डूबे। इनमें पंडित राजकुमार शुक्ल और संत राउत की प्रतिमाएं हैं, जिनको CM नीतीश कुमार ने लगवाया था।

30 घरों में 4-5 फीट पानी

जानकारी के अनुसार गांव के 2 घर नदी के पानी में विलीन हो गए हैं जबकि 4 घर गिर गए। 8 घर गिरने के कगार पर हैं। भरहवा निवासी झगरू पटेल व मंगरु पटेल का घर नदी में विलिन होकर बह गया। वहीं नागेंद्र यादव, दिवाकर तिवारी, अखिलेश यादव, नंभूई ठाकुर का घर बाढ़ के पानी में गिर गया है। जबकि बृजमोहन ठाकुर, सिकंदर ठाकुर, राजकुमार पटेल, देव यादव, किशुन यादव, मेघनाथ राम, भिखारी राम का घर गिरने के कगार पर पहुंच चुका है। कई लोगों का तो बखार भी अनाज सहित पानी में गिर गया है।

बेतिया में लगातार हो रही बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं। गांव में कहीं कमर भर तो कहीं छाती भर पानी बह रहा है। गांव के लोग दहशत में हैं और ऊंचे स्थान के लिए पलायन कर रहे हैं। अभी तक प्रशासन द्वारा लोगों तक कोई मदद नहीं पहुंच पाई है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि 2 दिनों से नेपाल की पहाड़ियों पर बारिश होने के कारण पंडई नदी का जलस्तर बढ़ गया है। नेपाल से सटे बेतिया के गौनाहा प्रखंड के कई गांव बाढ़ के चपेट में आ चुके हैं। अगल-बगल के कई गांव में बाढ़ का पानी घुस चुका है।

जिले में आई बाढ़ ने ऐसी बर्बादी और तबाही मचाई है कि लोग बेबस और लाचार हो गए हैं। गौनाहा प्रखंड के कई गांव को हर साल पंडई नदी की मार झेलनी पड़ती है। कई गांव टापू में तब्दील हो जाते हैं। इसके बाद सैकड़ों परिवारों को कई महीने सड़क किनारे खानाबदोश की जिंदगी बितानी पड़ती है।

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