टाइगर रिजर्व:बिहार का इकलौता टाइगर रिजर्व हमारे बेतिया के वाल्मीकिनगर में

बेतिया3 महीने पहले
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वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बिहार का एकलौता एवं भारत के प्रसिद्ध उद्यानों में से एक है। मुजफ्फरपुर से लगभग 215 किलोमीटर और बेतिया से 80 किलोमीटर की दूरी पर बाल्मिकीनगर में स्थित यह सुंदर एवं रमणीक पर्यटन स्थल है। लगभग 880 वर्ग किलोमीटर जंगल का 530 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र व्याघ्र परियोजना के लिए आरक्षित है। जबकि, 335 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र राष्ट्रीय उद्यान है। यह नेपाल के राजकीय चितवन नेशनल पार्क से सटा है। इसे वर्ष 1994 में देश का 18वां बाघ अभ्यारण्य बनाया गया था। वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना का हरा-भरा जंगल विभिन्न प्रजाति के पेड़-पौधे एवं वन जीवों से भरा पड़ा है। नेपाल एवं यूपी की सीमा पर अवस्थित यह टाइगर रिजर्व प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है।

दिन के उजाले में गंडक नदी के शांत पानी में पहाड़ का प्रतिबिंब बहुत ही मनोहारी एवं आकर्षक लगता है। जंगल सफारी के क्रम में पर्यटकों को अक्सर होने वाला बाघों का दीदार रोमांच व कौतूहल पैदा करता है। हिरण, चीतल, सांभर, तेंदुआ, नीलगाय, जंगली बिल्ली जैसे जंगली पशुओं के अलावे चितवन नेशनल पार्क से एकसिंगी गैंडा औ‍र जंगली भैंसा भी उद्यान में दिखाई देते है। वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना के जंगल में बाघ, तेंदुआ, बंदर, लंगूर ,हिरण, सांभर, भालू, गौर, जंगली कुत्ता, घड़ियाल, मगरमच्छ ,नीलगाय, मोर, पहाड़ी बुलबुल,पहाड़ी तोता सहित दर्जनों दुर्लभ प्रजाति के जीव यहां देखने को मिल जाएंगे।

ठहरने के लिए जंगल कैंप परिसर में बने हैं बंबू हट
गंडक नदी के तट पर जंगलों के बीच बने होटल वाल्मीकि बिहार, जंगल कैंप परिसर में बने बंबू हट, फोर फ्लैट के अलावा वाल्मीकि नगर, गनोली, नौरंगिया, गोवर्धना, मदनपुर, दोन,मंगुराहा आदि जगहों पर वन विभाग के रेस्ट हाउस हैं। वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना का दीदार करने के लिए सड़क एवं रेल मार्ग दोनों से पहुंचा जा सकता है।
पर्यटक ले सकते हैं ट्री हट का मजा
ट्री हट के माध्यम से कम खर्च पर पर्यटक प्रकृति को करीब से देख व महसूस कर सकते र्है। वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना के जंगल घूमने के लिए विभाग की ओर से वाहन एवं गाइड उपलब्ध कराए जाते हैं। गंडक नदी के जलाशय में नौका विहार का अलग ही मजा है। गंडक के शांत पानी को चीरते हुए जब मोटर बोट आगे बढ़ती है तो रोमांच अपने चरम पर होता है।

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