गीता दिवस:गीता ज्ञान की गंगा और सच्ची पथ प्रदर्शक है : डॉ. शिव

बेतियाएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
वेब संगोष्ठी में शामिल लोग। - Dainik Bhaskar
वेब संगोष्ठी में शामिल लोग।
  • डिग्री कॉलेज बगहा व एलएस कॉलेज मुजफ्फरपुर के तत्वावधान में आयोजित हुई वेब संगोष्ठी

गीता दिवस के अवसर पर एलएस कॉलेज मुजफ्फरपुर व गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज बगहा के संयुक्त तत्वाधान में वर्तमान वैश्विक द्वन्दात्मक परिदृश्य में गीता का महत्व विषय पर एक दिवसीय वेब संगोष्ठी आयोजित की गई। एलएस कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. शिव दीपक शर्मा ने कहा की गीता ज्ञान की गंगा है। यदि धरती पर प्रवाहित गंगा में स्नान से भौतिक शरीर का शुद्धिकरण होता है, तो गीता रूपी ज्ञान गंगा में गोता लगाने से मनुष्य का जीवन सफल शांत व सुखमय हो जाता है।मुख्य वक्ता लाल बहादुर शास्त्री विद्यापीठ नई दिल्ली के व्याकरण विभागाध्यक्ष डॉ दयाल सिंह पवार ने गीता के विविध आयामों पर विस्तृत चर्चा करते हुए आज के वैश्विक द्वन्दात्मक परिदृश्य में गीता की प्रासंगिकता को दोहराया। उन्होंने कहा आज से 5140 वर्षों पूर्व जब गीता का सृजन हुआ था, तब गीता जितना महत्वपूर्ण व उपयोगी थी आज भी उतना ही है।

गीता के विभिन्न श्लोकों के माध्यम से छात्राओं ने प्रस्तुति दी

संगोष्ठी के दौरान छात्र छात्राओं की ओर से अंकू कुमारी, कोमल भारती,रंजन कुमार व अन्नू कुमारी ने गीता के विभिन्न श्लोकों के माध्यम से अपनी प्रस्तुति दी। डॉ राजीव कुमार ने छात्र-छात्राओं के प्रस्तुति का सम्यक विश्लेषण किया।

वैश्विक द्वंदाें का सार्थक समाधान देने में सक्षम है गीता

डॉ. प्रसून दत्त सिंह ने बताया की गीता वास्तव में वैश्विक द्वंदाें का सार्थक व सशक्त समाधान देने में सक्षम है। एलएस कॉलेज की संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संगीता अग्रवाल ने अत्यंत संक्षेप में गीता सार प्रस्तुत कर इसके महत्व एवं आज के द्वन्दात्मक परिदृश्य में इसकी जरूरत को रेखांकित किया।

मार्गदर्शक है गीता
कार्यक्रम के अंत में गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज बगहा के प्राचार्य प्रोफेसर रविंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि आज हमारे युवा जो मुख्य रूप से राष्ट्र की मुख्यधारा से विचलित हो गए हैं और क्या करें क्या न करें के द्वंद में फंसे हुए हैं। उनके लिए गीता काफी महत्त्वपूर्ण है। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए डिग्री कॉलेज बगहा के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ संदीप कुमार सिंह ने संपूर्ण कार्यक्रम में विभिन्न वक्ताओं की प्रस्तुति की प्रशंसा करते हुए विद्वानों से बार-बार जुड़ने का अनुरोध किया। मंच संचालन डिग्री कॉलेज बगहा की मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. रेखा श्रीवास्तव ने की।

खबरें और भी हैं...