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अनदेखी:खेदारु मियां काे मिला था 25 एकड़ जमीन का पट्टा दखल का इंतजार करते-करते हो गए दिवंगत

बेतिया18 दिन पहले
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  • शनिवार को इंतकाल, तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी को सौंपी थी सोने की सुराही

नगर के गोड़ियापट्टी मोहल्ला निवासी खेदारु मियां का आखिरकार तंगी व गुरबत की हालत में ही शनिवार की रात में इंतकाल हो गया। ये वहीं खेदारु मियां हैं, जिन्होंने जवाहरातों से भरी सोने की सुराही पाने के बाद तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी को सौंपा था। इंदिरा गांधी ने इनकी ईमानदारी व देशभक्ति से प्रभावित होकर इन्हें 25 एकड़ खेतिहर जमीन का पट्टा दिलाया था। लेकिन संबंधित जमीन पर दखल सपना ही रह गया। नगर के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता दयाशंकर सिंह समेत कई अन्य लोग बताते हैं कि बगहा-2 में रेलवे की जमीन पर एक गुमटी में परचून के सामान बेचकर वे गुजर किया करते थे। 1980 के आसपास एक दोपहरी में न्यू बिहार होटल के पीछे वे शौच करने गए तो उन्हें सोने की एक सुराही मिल गई, जिसमें हीरे ,जवाहरात एवं सोने के सिक्के भरे पड़े थे।

खेदारु मियां ने इसे सरकार की संपत्ति मानते हुए प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को सौंपने की जिद के साथ तत्कालीन एसडीएम व अन्य अधिकारियों से मुलाकात की। हालांकि ज्यादातर लोगों ने उन्हें ऐसा करने से मना किया, लेकिन वे जिद पर अड़े रहे। अंततः उनका प्रण कामयाब हुआ। प्रशासन की पहल पर तत्कालीन पीएम से मिलकर उन्होंने सुराही सौंप दी। सुराही समेत उसमें मिले तमाम हीरे, जवाहरात व सोने के सिक्के पीएम सहायता कोष में जमा करा दिए गए। इसी ईमानदारी के एवज में तत्कालीन पीएम की पहल पर इन्हें 25 एकड़ जमीन का पट्टा मिला था, जिसपर उनका दखल कब्जा कभी नहीं हो पाया। अलबत्ते वे जमीन पर दखल कब्जे के लिए जन प्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक के दरवाजे जीवन भर खटखटाते रहे।

घर की महिलाओं को कागजात की कोई जानकारी नहीं

खेदारु मियां को पुत्र नहीं था। सलेमु व जयबुन नाम की दो बेटियां है। जयबुन के पुत्र फिरोज को उन्होंने गोद ले रखा है। वह रोजगार के सिलसिले में दिल्ली रहता है। घर पर मौजूद महिलाओं ने बताया कि वे सभी कागज अपने पास ही रखते थे। फिरोज होता तो शायद कुछ बता पाता। लेकिन फिरोज दिल्ली से लौटा नहीं है।

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