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नवरात्रि विशेष:इंडो-नेपाल बाॅर्डर पर स्थित मां सहोदरा के मंदिर में प्रतिदिन भरा जाता है माता का खोंइछा, पहनाई जाती है नई साड़ी

बेतियाएक महीने पहले
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  • मां सहोदरा के मंदिर में महिलाएं ही होती हैं पुजारी, रामनगर की रानी ने डाली थी मंदिर की नींव

पश्चिम चंपारण जिले के इंडो-नेपाल बार्डर पर स्थित गौनाहा प्रखंड के सहोदरा में स्थित मां सहोदरा का इतिहास काफी पुराना है। यहां के लोग इसे द्वापरयुगीन के साथ बौद्धकालीन भी मानते है। सहोदरा माता मंदिर की ख्याति इतनी है कि उनके दर्शन को भारत के विभिन्न प्रांतों सहित नेपाल से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु आया करते है। अव्वल तो यह कि माता को प्रतिदिन खोंइछा भरा जाता है और उन्हें नई साड़ी पहनाई जाती है। महिलाएं ही इस मंदिर की पुजारी होती है। मंदिर के आसपास साफ सफाई के दौरान प्राचीन काल के असंख्य प्रमाण मिले है। जिसमें सभी देवी देवताओं की खंडित प्रतिमाएं, चक्र, अष्टकोणीक कुआं आदि शामिल है। यहां के लोग मानते है कि इसका इतिहास काफी पुराना है। जो भी यहां मिला है वह प्रमाण के रूप में मंदिर परिसर में रखा गया है।

यह है इतिहास

कहां जाता है कि जब भगवान बुद्ध ने घर त्याग किया तो उनकी पत्नी यशोधरा अपने छोटे पुत्र राहुल के साथ उन्हें खोजते हुए यहां तक आई। जहां यहां के बदमाश बंजारों की नजर उनपर पड़ी और उन्होंने उनका सतीत्व भंग करना चाहा। जिससे यशोधरा ने मौत की देवी का आह्वान कर अपने सतीत्व की रक्षा की। वहीं यशोधरा कालांतर में सहोदरा बन गई। उधर, मंदिर के प्रधान पुजारी शंभू गुरु एवं पुजारी देवंती देवी ने बताया कि यह शक्तिपीठ है। यहां बिराजती माता श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा है। जंगल में बंजारों ने उन्हें घेर लिया और उनका अस्मत व आभूषण लूटना चाहा। उसी समय माता पाकड़ के पेड़ के समीप शिला रुप धारण कर ली।

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