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मौसम:जम्मू और हिमाचल में बर्फबारी के कारण बढ़ रही है ठंड, 12 जनवरी तक ऐसा ही रहेगा

बेतिया4 महीने पहले
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  • जम्मू और हिमाचल में बर्फबारी के कारण बढ़ रही है ठंड, 12 जनवरी तक ऐसा ही रहेगा

जिले में रविवार का दिन सबसे ठंडा रहा। सर्द हवाओं के कारण दिनभर ठिठुरन बनी रही। हालांकि छुट्टी का दिन होने के कारण सुबह से ही लोग घरों में दुबके रहे। नतीजतन सड़क व बाजारों में चहलकदमी काफी कम रही। सुबह 10 बजे तक घन कोहरा रहा। विजिब्लिटी 10 मीटर होने से हाईवे व ग्रामीण सड़कों पर वाहनों की रफ्तार थमती रही।

चिकित्सकों की माने तो सेहत और स्वास्थ्य के लिहाज से मौसम अनुकूल नहीं है। इन दिनों लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। खासकर बच्चे, बुजुर्ग व बीपी के मरीजों का बचाव ज्यादा जरूरी है। खेती की बात करें तो आलू और ते लहनी को छोड़ कर अन्य सभी फसलों के लिए यह मौसम अमृत सामान है। पाला पड़ने से गेहूं को जहां ज्यादा फायदा होगा वहीं आलू और ते लहनी खेती करने वाले किसानों का नुकसान हो सकता है।

किसानी कितना फायदा, कितना नुकसानदेह

कृषि अन संधान केन्द्र पूषा के वैज्ञानिक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की मानें तो रबी के खेती के लिए मौसम काफी अनुकूल है। गेहूं, दलहनी, मक्का व गन्ने के लिए शीतलहरी अमृत के सामान है। आलू और ते लहनी के लिए नुकसानदेह है।

जानिए... इस सर्दी का जनजीवन पर क्या होगा असर?

मानव जीवन : बच्चे व किशोरों में कोल्ड डायरिया, निमोनिया, सर्दी-खांसी, वायरल फीवर, टाईफाइड व चर्म रोग की शिकायत हो सकती है।

बुजुर्गों में : सांस व कफ की शिकायत, छाती व जोड़ों में दर्द, पापी कम पीने से पेचिस व अपच, शुगर का बढ़ना, बीपी के मरीजों में लकवा व बेन हैम्बोजिंग जैसी शिकायत हो सकती है।

मवेशी : छींकने की बीमारी, छेरी रोग, गोरखा, पाचन तंत्र की कमजोरी बढ़ जाती है।

अचानक शीतलहर का कारण क्या है

मौसम वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार ने बताया कि इन दिनों हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी हो रही है। नतीजतन शीतलहर चलने लगी है। हिमालय की चोटियों पर होनेवाले तुषार पात से पश्चिमोत्तर की हवा बर्फीली हो जाती है। ठंड के दिनों में इन हवाओं का चलना कष्टप्रद एवं कई बार जानलेवा होती है।

फायदे की खेती

तापमान जितना कम होगा गेहूं की पैदावार उतनी ही ज्यादा होगी। इसके अलावा दलहनी, मकई व गन्ने की खेतों में नमी ज्यादा होने से पौधों का ग्रोथ ज्यादा होगा। गेहूं में ज्यादा कल्ले बनेंगे, इससे उत्पादन बढ़ेगा। डंठल मजबूत होने से दाने पुष्ट व वजनदार होंगे।

मौसम में आगे क्या?

गलन भरी ठंडी तीन दिनों से जनजीवन को टॉर्चर कर रही है। अगामी 15 दिन सीवियर कोल्ड की स्थिति रहेगी। मौसम वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार के अनुसार न्यूनतम तापमान 8.5 डिग्री से नीचे हो तो इसे सीवियर कोल्ड डे यानि तीव्र शीतल दिन कहा जाता है। इस बार ठंड ज्यादा पड़ले वाली है। तापमान का नीचला स्तर 5 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। शीतलहर का असर 12 जनवरी तक बरकरार रहने की संभावना है। इसमें 11 दिन सि वियर कोल्ड रहेगी।

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