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व्यवस्था की हार इंसानियत की जीत:11 घंटे तक बेड पर पड़ा रहा संक्रमित का शव

बेतिया11 दिन पहले
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शव का दाह-संस्कार कराते नगर प्रबंधक व अन्य। - Dainik Bhaskar
शव का दाह-संस्कार कराते नगर प्रबंधक व अन्य।
  • अंतिम संस्कार के लिए बेचैन रहे परिजन : नगर प्रबंधक, दैनिक भास्कर के पत्रकार व एंबुलेंस चालक ने पीपीई किट पहन उठाई लाश

नरकटियागंज अनुमंडलीय अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में मौत के 11 घंटे बाद तक मृतक प्रशांत अमित का शव बेड पर पड़ा रहा। परिजन अंतिम संस्कार के लिए बेचैन थे लेकिन अस्पताल प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ था। अनुमंडलीय अस्पताल में एंबुलेंस से शव को घाटों पर पहुंचाने के लिए व्यवस्था है। लेकिन शव को बेड से एंबुलेंस में रखने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। जिसके कारण आए दिन लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। मजबूरन परिजन ही किसी तरह से अपने मृतक का शव खुद एंबुलेंस में लाद कर ले गए।

बताया जाता है कि नरकटियागंज अनुमंडलीय अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कोरोना संक्रमित मरीज के मौत के बाद अंतिम संस्कार के लिए अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई। खासकर एंबुलेंस में शव रखने के लिए एक भी अस्पताल कर्मी तैयार नहीं हुए। कर्मियों के तैयार नहीं होने से तथा उनकी लापरवाही से एक युवक का शव 11 घंटे तक बेड पर ही पड़ा रहा। कोरोना संक्रमित की मौत सुबह 9 बजे हुई थी लेकिन रात्रि साढे सात बजे के करीब शव को एंबुलेंस में रखा गया तथा चीनी मिल घाट पर अंतिम-संस्कार किया गया।

नरकटियागंज अनुमंडलीय अस्पताल में संक्रमित का शव एंबुलेंस में रखने के लिए नहीं है व्यवस्था, परिजन खुद गाड़ी में रखते हैं शव

चार अतिरिक्त कर्मियों का शव उठाने के लिए की गई है मांग
संध्या 7 बजे तक जब अस्पताल की ओर से शव को नहीं उठाया गया तो इसकी सूचना परिजनों ने अनुमंडल पदाधिकारी व नगर प्रबंधक को भी दी। नगर प्रबंधक दो सफाई कर्मियों के साथ पहुंचे और पीपीई किट पहनकर दैनिक भास्कर के पत्रकार रहमान की मदद से अंतिम संस्कार के लिए शव को बेड से उठाया, उसके बाद रात्रि साढ़े आठ बजे अंतिम संस्कार किया गया। दिन में भी तीन मौतें हुई थी लेकिन शव उठाने के लिए एक भी अस्पताल कर्मी आगे नहीं आए। जिसके कारण परिजनों के बीच कहासुनी भी हुई थी। प्रशासनिक प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुनील कुमार ने 4 अतिरिक्त कर्मियों को शव उठाने के लिए अनुमंडल पदाधिकारी से मांग की है।

कई बार अस्पताल को सूचना देने के बाद भी नहीं मिली मदद
परिजनों ने आरोप लगाया कि 12 बजे से लेकर कई बार अस्पताल प्रबंधन को शव उठाने के लिए सूचना दिया गया। लेकिन अस्पताल के कोई भी कर्मी शव उठाने को तैयार नहीं थे। कई बार प्रयास किया गया बावजूद इसके साढ़े सात बजे संध्या तक शव अस्पताल में ही पड़ा हुआ था। नगर प्रबंधक विनय रंजन, दैनिक भास्कर के पत्रकार मो. रहमान, एंबुलेंस चालक राधेश्याम प्रसाद व सफाई कर्मी राकेश कुमार पीपीई किट पहन कर शव उठवाया। उसके बाद चीनी मिल घाट पर शव को अंतिम संस्कार किया गया।

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