जागरूकता:सड़क दुर्घटना के बाद पहला घंटा अनमोल जागरुकता से बचाई जा सकती है जिंदगियां

बेतिया3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • हड्डी एवं जोड़ सप्ताह पर सिटी आर्थोपेडिक क्लब ने लोगों को किया जागरूक

देश में प्रतिवर्ष सड़क दुर्घटनाओं में लाखों लोगों की जान जाती है। लेकिन सतर्कता व सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन कर संभावित खतरे को कम किया जा सकता है। उक्त बातें शहर के हड्डी,जोड़ एवं नस रोग विशेषज्ञ सह बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के जिला संयोजक डॉ उमेश कुमार ने कही। वे बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के आह्वान पर शहर के नारायणी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में आयोजित हड्डी जोड़ सप्ताह के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मरीजों व परिजनों को संबोधित कर रहे थे। डॉ कुमार ने कहा कि सड़क दुर्घटना के बाद पहला एक घंटा सुनहरा घंटा होता है।इस दौरान जागरूकता व सतर्कता के साथ सही प्राथमिक उपचार सड़क दुर्घटना के शिकार अधिकांश लोगों की जान बचा सकता है।

लेकिन इसके लिए सही जानकारी का होना आवश्यक है। कार्यक्रम के दौरान सिटी आर्थोपेडिक क्लब पश्चिम चंपारण की ओर से कार्यक्रम में शामिल लोगों को प्रशिक्षण दिया गया। क्लब के सदस्य डॉ उमेश कुमार, डॉ आनंद ओसवाल्ड, डाॅ रूद्र नारायण पाण्डेय, डॉ दीपक जायसवाल, एसएन कूलियार ने लोगों को सड़क दुर्घटना के बाद की स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण दिया। एसोसिएशन के जिला संयोजक डॉ उमेश कुमार ने बताया कि इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन ने सेव सेल्फ सेव वन इस वर्ष का थीम निर्धारित किया है।

खबरें और भी हैं...