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नवरात्र विशेष:गंडकी के तट पर स्थित नरदेवी मंदिर में नियमित आता है बाघ, सोर्डी के राजा बृजासन की हवेली पर विराजती है मां

बेतियाएक महीने पहले
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  • मंदिर के पुजारी सहित आसपास के दुकानदार व श्रद्धालुओं काे भी हाे चुका है बाघ का दर्शन

जिला मुख्यालय बेतिया से 110 किलोमीटर उत्तर पश्चिम भारत नेपाल की सीमा पर पावन गंडकी के तट पर स्थित वाल्मीकिनगर (भैसालोटन) देश प्रसिद्ध स्थलों में एक है। नदियों, पहाड़ों व वनों से आच्छादित यह स्थान काफी मनोरम है। इसका इतिहास सदियों से काफी धनी रहा है। नरदेवी मंदिर के पुजारी नागेंद्र पुरी ने बताया कि प्राचीन काल में यह स्थान सोर्डी राज हुआ करता था। जहां राजा बृजासन शासन किया करते थे। उनका भाई झगरु काफी बिगड़ैल स्वभाव का था। एक दिन झगरु ने राजा का सिर काटकर पास ही के बारामाथी में राज्य के आम के बगीचे में स्थित बरगद के पेड़ से लटका दिया। झगरु के आतंक से राजा का परिवार पहले वनरस के मियां तालन फिर मध्यप्रदेश के मैहर में जाकर शरण लिया। जब राजा के दोनों पुत्र आल्हा व रुदल बड़े हुए तो उन्होंने फिर से सोर्डी का रुख किया और झगरु को मारकर शासन आरंभ किया।

राजा के कुल की कन्या ने ही दिखाया था स्पप्न, आल्हा व रुदल ने करनी शुरू की थी पूजा

मंदिर के आसपास विशाल हवेली के खंडहर के अवशेष मिलते है

इसबीच आल्हा-रुदल को स्वप्न आया कि उनके कुल की एक कन्या कह रही है कि अपने परिवार की रक्षा के लिए उनकी पूजा करों। दूसरे दिन अाल्हा व रुदल ने अपनी हवेली में ही माता को स्थापित कर पूजा करना शुरू कर दिया। जबकि बारामथी में आज भी राज का बगीचा है। जबकि मंदिर के आसपास किसी विशाल हवेली के खंडहर के अवशेष मिलते है। पुजारी ने बताया कि माता का सवारी बाघ 24 घंटे में एक बार माता के मंदिर परिसर में जरूर आता है। मंदिर के पुजारी व आसपास दुकान लगाने वाले व्यवसायी से लेकर श्रद्धालु तक भी कभी कभार उसका दर्शन कर लिया करते है।

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