ग्रहाें की स्थिति:16 दिसंबर से एक महीने के लिए मांगलिक कार्यों पर लग जाएगा ब्रेक, दोपहर एक बजे से शुरू हो जाएगा खरमास

बेतियाएक महीने पहले
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  • सूर्य के धनु और मीन राशि में प्रवेश के बाद मांगलिक कार्यों पर लग जाती है पाबंदी

16 दिसंबर गुरुवार को दोपहर एक बजे से खरमास की शुरुआत होगी। इसी के साथ सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों पर एक माह के लिए ब्रेक लग जाएगा। आचार्य राधा कांत शास्त्री ने बताया कि ग्रहों की चाल व उनकी स्थिति का प्रभाव व्यक्ति के जीवन में होने वाली प्रत्येक घटना पर पड़ता है। इसके कारण कई बार लाभ मिलता है तो कई बार हानि भी झेलनी पड़ती है। ये लाभ व हानि इस बात पर निर्भर करती है कि ग्रहों के चाल के अनुसार कौन से कार्य सही समय पर किये गए हैं और कौन से कार्य गलत समय पर, ग्रहों की इन्हीं स्थितियों में से एक है खरमास। जिस प्रकार चातुर्मास व पितृ पक्ष में किसी भी तरह के शुभ और नए कार्य करना वर्जित होता है। उसी तरह खरमास में भी विशेष शुभ कार्यों को वर्जित माना गया है। इस बार खरमास 16 दिसंबर 2021 गुरुवार को दिन में एक बजे से शुरू हो रहा है, जो कि मकर संक्रांति यानी 14 जनवरी 2022 को रात्रि 8:50 पर समाप्त होगा।

सूर्य धनु राशि से मकर में प्रवेश करते हैं तो शुभ कार्य दोबारा शुरू हो जाते हैं

ज्योतिष के अनुसार, सूर्य हर एक राशि में एक महीने 28, 29, 30 से 31 दिन के लिए रहते हैं। 12 महीनों में सूर्य ज्योतिष की 12 राशियों में प्रवेश करते हैं। 12 राशियों में भ्रमण करते हुए जब सूर्य देव गुरु बृहस्पति की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं तो उस स्थिति को खरमास कहते हैं। सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने पर सभी मांगलिक कार्य एक महीने के लिए बंद हो जाते हैं। जब सूर्य मकर संक्रांति के दिन धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो सभी शुभ कार्य दोबारा शुरू हो जाते हैं। इस तरह से साल में दो बार ऐसा समय आता है जब सूर्य के धनु व मीन राशि में प्रवेश करने पर मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं।

15 जनवरी 2022 को पुण्यकाल होगा

मकर संक्रांति के 14 जनवरी को रात्रि 8:50 पर होने से 16 घंटे बाद तक पुण्यकाल माना जाएगा। अगले दिन 15 जनवरी 2022 को पुण्यकाल होगा। इसी दिन स्नान दान के साथ खिचड़ी पर्व मनाया जाएगा। आचार्य शास्त्री ने बताया कि भारतीय ज्योतिष के अनुसार खरमास में मांगलिक कार्य जैसे- शादी, सगाई, वधु प्रवेश, गृह प्रवेश, गृह निर्माण, नए व्यापार का आरंभ आदि नहीं किए जाएंगे। इस समय सूर्य गुरु की राशि में रहेंगे। इसके कारण गुरु का प्रभाव कम हो जाता है, जबकि मांगलिक कार्यों के सिद्ध होने के लिए गुरु का प्रबल होना बहुत आवश्यक है। इस अवधि में गुप्त आराधना, भगवत भजन, नाम जप, रामायण पाठ, अष्टयाम, ग्रहशांति व तांत्रिक पूजन विशेष फलदाई होते हैं।

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