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चुनावी दंगल:दो बार कांग्रेस से नहीं मिला टिकट तो तीसरी बार देवर के खिलाफ निर्दलीय खड़ी हुई भाभी

बेतिया12 दिन पहले
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  • लौरिया से निर्दलीय उतरी नीलम सिंह, देवर विनय बिहारी रह चुके हैं मंत्री

(करुणेश केशव) विधानसभा चुनाव की डुगडुगी बजने के बाद चुनावी दंगल में कूदने को लेकर पार्टी के प्रति समर्पित कार्यकर्ताओं की आस्था टिकट बंटवारे के बाद दरकनी शुरू हो गई है। टिकट कटने के बाद तो दलबदल व इस्तीफा का दौर जिले में लगातार चल रहा है। ऐसे में जिले के लौरिया विधानसभा में पार्टी की आस्था के साथ-साथ रिश्ते भी दरकने लगे है।

एनडीए के पूर्व मंत्री सह निवर्तमान विधायक विनय बिहारी की सगी भाभी नीलम सिंह ने लौरिया विधानसभा से निर्दलीय अभ्यर्थी के रूप में नामांकन कर अपने ही देवर से दो--दो हाथ करने को तैयार हो गई हैं। देवर के खिलाफ चुनाव में दमखम के साथ भाभी का आना, यहां की लडाई को दिलचस्प बना रहा हैं। बता कि नीलम के पति आईआरएस अधिकारी हैं।

पद की महत्वाकांक्षा रिश्ते पर पड़ रही भारी

सतासुख व पद की महत्वाकांक्षा रिश्ते पर भारी पड़ रहा है। हालांकि नीलम का राजनीति में आना नई बात नहीं है। वे 2000 में कांग्रेस पार्टी का कार्यकर्ता बनकर लौरिया विधानसभा से ताल ठोकने का प्रयास की थी। लेकिन टिकट के खेल में गच्चा खा गई। उनकी महत्वकांक्षा दबी रह गयी। पुन: 2005 में फिर चुनाव लडऩे को तैयार हुई। लेकिन यहां भी कामयाबी नहीं मिली। अब फिर 15 साल बाद वह अपनी इच्छा को दबा नहीं पाई और शुक्रवार को निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में नामांकन कर दिया।

उधर, युवा चेहरा व विकास की बात कह सिनेस्टार विनय बिहारी चुनावी दंगल में कूदे, लेकिन हार का सामना करना पडा। उसके बाद भी वे लगे रहे व 2010 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे। फिर 2015 में भी भाजपा से विनय चुनाव लड़े व जीते। लेकिन इस बार विरोधियों के अलावे विनय को खुद के रिश्ते के साथ भी लड़कर चुनावी बैतरनी पार करनी पड़ रही है।

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