कार्रवाई की मांग:विद्यालय भवन का निर्माण पूर्ण कराने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन

बेतिया2 महीने पहले
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राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय लक्षनही के प्रांगण में जर्जर हो चुका विद्यालय का अपूर्ण भवन।  - Dainik Bhaskar
राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय लक्षनही के प्रांगण में जर्जर हो चुका विद्यालय का अपूर्ण भवन। 
  • राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय लक्षनही के प्रांगण में 16 वर्ष से अपूर्ण है भवन

प्रखंड स्थित राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय लक्षनही के प्रांगण में पिछले 16 वर्ष से अपूर्ण भवन को पूर्ण कराने और संबंधित शिक्षकों पर कार्यवाही करने की मांग को लेकर मंगलवार को स्थानीय मुखिया जगदीश यादव के नेतृत्व में ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया और जल्द कार्यवाही नही होने पर बीआरसी के घेराव की चेतावनी दी। ग्रामीणों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2004-05 में डीपीईडी योजना के तहत प्रधानाध्यापक कक्ष व विद्यालय के लिए तीन रूम का निर्माण तत्कालीन प्रधान शिक्षक नरेंद्र कुमार ठाकुर द्वारा शुरू किया गया।

शुरुआती दौर में विद्यालय भवन का निर्माण कार्य तेज गति से हुआ और भवन की दीवाल छत तक हो गई। लेकिन छत का लिंटर नही हुआ और प्रधान शिक्षक द्वारा विद्यालय भवन की पूर्ण राशि की भी निकासी लिंटर कराने के नाम पर कर ली गई। लेकिन इसी बीच 2006 मे उनका स्थानांतरण अन्यत्र विद्यालय में हो गया। उनके स्थानांतरण के बाद विद्यालय का कार्य बंद हो गया। कुछ दिनों तक उनके द्वारा कार्य जल्द कराने की बात ग्रामीणों से कही जाती थी। लेकिन वे न तो दुबारा लौट के आये और न ही भवन का निर्माण ही पूर्ण कराये।

इसको ले स्थानीय ग्रामीण कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से भी गुहार लगाए, पत्राचार भी हुआ। लेकिन कोई प्रभाव नही पड़ा। वहीं भवन नहीं होने से पठन-पाठन पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। विद्यालय में कक्षा आठ तक को पढ़ाई होती है और नामांकित बच्चों की संख्या 280 है। कार्यरत शिक्षकों की संख्या छह है लेकिन बच्चों के बैठने के लिए मात्र दो कमरे है। ग्रामीण हरिलाल पटेल, उमेश यादव, बेचू यादव विपिन यादव, उमा यादव, मदन पटेल, सुदामा यादव, गोपाल चौधरी, गुलाब चौहान, सरपंच पप्पू यादव आदि ने बताया कि इस विद्यालय में लक्षनही व हलुवईया पट्टी गांव के बच्चे पढ़ते है।

दोनों गांव के बीच मे मात्र यही एक विद्यालय है। लेकिन विद्यालय में भवन नही होने से बच्चों के बैठने में असुविधा होती है। इसको ले बच्चें विद्यालय जाने से कतराते है। ग्रामीणों ने कहा की अगर उनकी मांग जल्द नही मानी जाती तो वे लोग चरणबद्ध तरीके से आंदोलन करने को मजबूर हो जायेगे। वही बीईओ सीताराम सिंह ने बताया कि इस मामले की जांच करा संबंधित तत्कालीन प्रधान शिक्षक पर कार्यवाही की अनुशंसा को जाएगी।

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