पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

बर्बादी की बाढ़:घरों से निकला पानी, लेकिन बर्बाद हो गई फसल, ​​​​​​​निवाले की चिंता

मनोज यादव|मधुबनी12 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
दियारे का रेवहिया गांव। - Dainik Bhaskar
दियारे का रेवहिया गांव।
  • मधुबनी प्रखंड के सोहागी बरवा, बीरता गांव, चिउरही व रेवहिया गांवों में बरसात में ही घराें में दो बार घुसा पानी, नहीं मिली अबतक कोई सरकारी सहायता

मधुबनी प्रखंड के सोहगी बरवा, बीरता गांव, चिउरही व रेवहिया गांवों से बाढ़ का पानी निकल चुका है, लेकिन बाढ़ के दौरान उत्पन्न हुई तबाही से निजात यहां के लोगों के लिए आसान नहीं है। घर - घर मे पानी घुसने से तमाम घरेलू सामान बर्बाद हो गए। सरेह में लगी फसल भी नष्ट हो गई। प्रशासन ने अबतक कोई सहायता की नहीं है। गुजर बसर के लिए बेचैन यहां के लोगों की पहली समस्या बाढ़ के दौरान बर्बाद हुए अपने आशियानों को दुरुस्त करने की है। मधुबनी प्रखंड की चिउरही व सिसई पंचायत में अवस्थित दियारा इलाके के ये गांव प्रतिवर्ष बाढ़ की तबाही झेलते रहे हैं। चालू बरसात के दौरान इन गांवों में अबतक दो बार बाढ़ व बारिश का पानी घर - घर में घुसकर तबाही मचा चुका है। फिलहाल लोग बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए घरो की मरमत करने में जुटे हैं। हालांकि इन गांवों के लोग मान रहे हैं कि शायद अब बाढ़ की नौबत नहीं आएगी। लेकिन मौसम के तेवर बदलते ही यहां के लोगों का कलेजा धड़क उठता है।
घरों की मरम्मत में जुटे बाढ़ पीड़ित| दियारे के इन गांवों में बाढ़ की तबाही को ही देखते हुए लोगों ने छोटे-छोटे घर बनाए हैं, जो इस बार बाढ़ के पानी से पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। अपने आशियाने को ठीक करने में बाढ़ पीड़ित जुटे हुए हैं। आज से ही फिर अगले बरस की चिंता इन बाढ़ पीड़ित परिवारों को सताने लगी है। गन्ना एवं धान की फसल के पूरी तरह से बर्बाद हो जाने से चिंतित ग्रामीणों ने कहा कि इस वर्ष तो भोजन पर भी आफत है। फसल क्षति का मुआवजा एवं बाढ़ आपदा की सहायता राशि मिलने पर जरूर लोगों को कुछ राहत मिल पाती।
इन चार गांवों के लिए स्कूल तो है लेकिन नही हो पाता सही रूप से पठन पाठन | दियारे के इन चारों गांवों के स्कूल तो है।लेकिन बरसात के तीन महीने तक स्कूल के आसपास बाढ़ व बारिश का पानी जमा होने से सुचारू रूप से पठन-पाठन नही हो पाता है। चिउरही में प्राथमिक विद्यालय है। इस विद्यालय का परिसर भी पिछले लगभग दो माह से पानी से भरा हुआ था। हालांकि अब परिसर का पानी निकल गया है। इससे बच्चों को थोड़ी राहत मिली है।

एेसा काेई परिवार नहीं, जिसने तबाही नहीं झेली
बाढ़ पीड़ित अशरफ मियां, वकील मियां, हरख कुशवाहा, केदार कुशवाहा, विश्वनाथ कुशवाहा, शंभू कुशवाहा, शंभू यादव, छोटेलाल कुशवाहा, रामायण यादव, रामाशीष यादव, शिवनाथ यादव, रघुनाथ महतो, रियाज मियां, लालबाबू महतो आदि ने बताया कि सिसई व चिउरही पंचायत के ये चारों गांव प्रत्येक वर्ष बाढ़ का कहर झेलते हैं। चारों गांव में लगभग 200 परिवार बसे हैं। कोई भी ऐसा परिवार नहीं है जो बाढ़ के दुष्प्रभाव से बच पाया हो। घरों में बाढ़ का पानी अकस्मात घुसने से अनाज सहित अन्य घरेलू सामान पानी में बह गए थे।

अपने माल मवेशियों को साथ लोग कई दिनों तक धनहा-रतवल मुख्य पथ पर शरण लिए रहे। ताज्जुब कि प्रशासन के अधिकारियों से लेकर निर्वाचित प्रतिनिधियों तक ने उनका हाल जानने की जरूरत अबतक नहीं समझी है। बाढ़ पीड़ितों ने प्रशासन से बाढ़ राहत सामग्री मुहैया कराने की मांग की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। लोग भुखमरी के कगार पर हैं। खेत में लगी धान व गन्ने की फसल भी पूरी तरह से सूख गई है। फसल का मुआवजा मिलेगा या नहीं इसका भी कोई ठिकाना नहीं है।

^प्रखंड का कौन पंचायत बाढ़ से प्रभावित होता है इस संबंध में अभी मुझे जानकारी नही है। अगर बाढ़ से दियारे का गांव प्रभावित हुआ है तो इस संबंध में जानकारी प्राप्त कर जिला को सूचित किया जाएगा।
गौरव प्रकाश, सीओ, मधुबनी

खबरें और भी हैं...