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लापरवाही:डीएमसीएच में 24 घंटे में फिर एक बच्चे की हो गई मौत एनआईसीयू में 25 बेड में से 5 खराब, जरूरी दवा की कमी

दरभंगा13 दिन पहले
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डीएमसीएच के शिशु विभाग के इमरजेंसी वार्ड में एक ही बेड पर चल रहा दो-दो बच्चे का इलाज। - Dainik Bhaskar
डीएमसीएच के शिशु विभाग के इमरजेंसी वार्ड में एक ही बेड पर चल रहा दो-दो बच्चे का इलाज।
  • शिशु विभाग के ओपीडी और इमरजेंसी में 215 बच्चे इलाज के लिए पहुंचे, इनमें से 9 गंभीर बच्चे हुए भर्ती

पिछले 24 घंटे में शिशु विभाग के एनआईसीयू टू में फिर 15 दिनाें के एक नवजात की मौत हो गई एवं 25 बच्चाें काे डिस्चार्ज किया गया। मृतक बच्चे की शिनाख्त जिले के बहेड़ा थाने के बलुआम गांव के सुमन झा के रूप में हुई। उसे 3 सितंबर को भर्ती किया गया था। बच्चा शारीरिक रूप से कमजोर था। उसकी मौत सोमवार की देर रात हो गई। डीएमसीएच के शिशु विभाग में इमरजेंसी ड्रग्स की घोर कमी पड़ गई है। बच्चे के कफ सिरफ और मल्टीविटामिन की दवा भी नहीं दी जा रही है। दूर-दराज से आने वाले बच्चाें के परिजनों को महंगी दवा बाजार से खरीदनी पड़ रही है। इधर, बच्चों में वायरल बुखार होने का सिलसिला थम नहीं रहा है। मंगलवार को डीएमसीएच के शिशु विभाग के ओपीडी और इमरजेंसी समेत कुल 215 बच्चे इलाज के लिए पहुंचे, इनमें से 9 गंभीर बच्चे को भर्ती कर लिया गया।

हालांकि ओपीडी में आने वाले 165 बच्चे में से अधिकतर बच्चे सर्दी, खांसी, बुखार से पीड़ित थे। अधिकतर को ओपीडी में ही डॉक्टरों ने देखने के बाद छुट्टी दे दी। अस्पताल आने वाले बच्चे में खांसी में बलगम की शिकायत भी देखी जा रही है। 16 दिन का बच्चा 3 दिनों से ऑक्सीजन पर : झंझारपुर की प्रमेश्वरी देवी का 16 दिन का बच्चा 3 दिनों से ऑक्सीजन पर है। उसने बताया कि बच्चे को ऑक्सीजन देने के लिए पाइप भी बाजार से ही खरीदकर लानी पड़ रही है। दूसरे बच्चे की मां बबीता देवी ने बताया कि बाजार से 150 रुपए में थर्मामीटर, कैल्शियम इंजेक्शन, कैल्शियम सिरप, नेबुलाइजर मास्क, बच्चे को भाप देने की दवा समेत अन्य दवा बाजार से खरीदकर लानी पड़ती है।

शिशु विभाग के आईसीयू वार्ड में जमीन पर बैठकर बच्चे को भाप दिलाती मां।
शिशु विभाग के आईसीयू वार्ड में जमीन पर बैठकर बच्चे को भाप दिलाती मां।

वार्डों में भर्ती बच्चों में से 25 के स्वस्थ होने पर किया गया डिस्चार्ज

बेड खराब रहने से जनरल वार्ड में भर्ती कर बच्चों का होता है इलाज

एनआईसीयू टू में 25 बेड में से 5 बेड खराब हैं। इसमें से एक बेड का वार्मर ठीक है, लेकिन बेड नहीं है। एनआईसीयू टू के पांच बेड खराब होने से बीमार बच्चाें का जनरल वार्ड में भर्ती कर इलाज करना पड़ता है। एनआईसीयू नवजात पूरी तरह से फूल है। एक बच्चे के हटने के बाद तुरंत ही दूसरे बच्चे को लिटा दिया जाता है। वहीं एनआईसीयू में जगह नहीं होने से नवजात बच्चे को परेशानी हो रही है। अस्पताल में पानी के लिए लगा ऑरो खराब है।

दवा की डिमांड की गई है : डॉ. अशोक कुमार

शिशु विभाग के वरीय चिकित्सक डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि दवा की डिमांड की गई है। प्राइवेट अस्पताल से गंभीर होकर बच्चे आते हैं। जिसके कारण बच्चे की मौत हो जाती है। एनआईसीयू में जिस बच्चे की माैत हुई वो पहले से ही गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती हुए थे।

बीमार बच्चों से दूरी बनाकर रखें : सलीम

^वायरल बुखार के केस बढ़ रहे हैं। इसलिए बच्चे को एक दूसरे से दूरी बनाकर रखें। बुखार 24 से 48 घंटे रहे और सांस लेने में दिक्कत हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
-डॉ. सलीम अहमद, शिशु रोग विशेषज्ञ, मैट्रो हॉस्पिटल, दरभंगा


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