नाराजगी:भाजपा काे सत्ता से उखाड़ फेंकने की जरूरत, बिहार में नीतीश सरकार भी किसान आंदोलन के खिलाफ ही है : विश्वेश्वर

दरभंगा8 महीने पहले
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  • भाकपा-माले व किसान महासभा की किसान रथ यात्रा रविवार को हायाघाट पहुंची, महंगाई पर रोक लगाने की मांग की गई

स्वामी सहजानंद सरस्वती की जयंती पर उनके बिहटा स्थित आश्रम से शुरू भाकपा-माले व किसान महासभा की किसान रथ यात्रा रविवार को हायाघाट पहुंची। इस दौरान मोदी सरकार से किसान विरोधी तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीदने का कानून बनाने, बिहार में सरकारी मंडी व्यवस्था बहाल करने, बंटाईदाराें को सभी तरह के सरकारी लाभ देने की गारंटी करने तथा बढ़ती महंगाई पर रोक लगाने की मांग की गई। किसान महासभा के राज्य अध्यक्ष विशेश्वर यादव ने कहा कि मोदी सरकार के सभी तरह के हमलों व दुष्प्रचार से जूझते हुए किसान आंदोलन 100 दिन पार कर चुका है। भाजपा को सत्ता से बाहर करने के संकल्प के साथ यह आंदोलन अब आजादी की दूसरी लड़ाई में बदल गई है।

उन्होंने कहा कि बिहार में नीतीश सरकार भी किसान आंदोलन के खिलाफ खड़ी है। लेकिन बिहार के किसान बिहार में भी मंडी व्यवस्था चालू करने तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीदने की मांग कर रहे हैं। हमारी यह भी मांग है कि बंटाईदाराें को भी सभी तरह के लाभ सरकार देने की गारंटी करे। लेकिन मोदी सरकार अपने सत्ता के घमंड में चूर है। जिसे किसान आंदोलन झुका कर रहेगी और यह बताएगी कि देश में किसान से बड़ा कोई नहीं है।

विधान सभा मार्च काे सफल बनाने की अपील की गई
माले प्रखंड प्रभारी जंगी यादव ने कहा कि हायाघाट विधानसभा के सभी किसान मजदूर एक होकर 18 मार्च को संपूर्ण क्रांति दिवस पर काले कृषि कानूनों की वापसी तथा किसान अधिकारों की गारंटी के लिए पटना विधान सभा के समक्ष आयोजित मार्च में हजारों की संख्या में भाग लें। साथ ही साथ पंचायतों में किसान विरोधी तीन कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन तेज करने की अपील किया। यादव ने कहा कि मोदी सरकार ने किसानों के साथ विश्वासघात किया है देश में ऐसा पहला दौर आया है जिससे किसान एवं आम मजदूर परेशान है। मौके पर यात्रा का नेतृत्व कर रहे अखिल भारतीय किसान महासभा के राज्य अध्यक्ष विशेश्वर यादव, माले किसान नेता होरिल राय, डॉ. प्रेमा सिंह यादव, मो. जमाल उद्दीन, खेग्रामस जिला अध्यक्ष जंगी यादव, सन्तोष यादव, मो. लालू,डॉ. सुहेब, रामविलास मंडल, अली मोहम्मद, विश्वनाथ पासवान, फूलों देवी, नगीना, मंजू, मोहन सहनी, मुकेश, घनश्याम, शंभू यादव मौजूद थे।

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