कार्यक्रम:जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी जदयू की दोनों सरकार प्रदेश की बर्बाद उच्च शिक्षा पर चुप

दरभंगाएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
प्रेसवार्ता करते आईसा के सदस्य। - Dainik Bhaskar
प्रेसवार्ता करते आईसा के सदस्य।
  • कुलपति- कुलसचिव की बर्खास्तगी की मांग को लेकर मिथिलांचल बंद को सफल बनाने की अपील

आज बिहार की उच्च शिक्षा बर्बादी की ओर अग्रसर है। पूरे बिहार के विश्वविद्यालयों में भ्रष्टाचार की बौछार है। कहीं कुलपति तो कहीं कुलसचिव के नेतृत्व में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली भाजपा-जदयू सरकार आज बिहार की बर्बाद उच्च शिक्षा पर चुपी साधी हुई है। ये बातें सोमवार को आईसा जिला कार्यालय पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आईसा नेताओं में कहीं। संवाददाता सम्मेलन के आईसा के राज्य सह सचिव सह दरभंगा जिला अध्यक्ष प्रिंस राज, राज्य सह सचिव सह जिला सचिव मयंक कुमार यादव, राज्य सह सचिव राजू कर्ण, जिला सह सचिव ओणम सिंह शामिल थे।

आईसा नेताओं ने कहा कि 15 दिसंबर को मिथिला बंद के साथ-साथ पूरे बिहार में राज्यपाल व मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया जाएगा। साथ ही साथ 7 दिसंबर को कल्याण छात्रावास में खाली कमरे को छात्र को आवंटित करने व सभी एससी एसटी छात्रों को छात्रवृत्ति देने की मांग को लेकर प्रतिवाद मार्च निकाला जाएगा। वहीं 22 दिसंबर को पूरे बिहार में विश्वविद्यालय बंद की घोषणा की गई है। जिसे सफल बनाने को लेकर जगह-जगह मीटिंग आयोजित की जाएगी।
राजभवन व बिहार सरकार के प्रत्यक्ष नेतृत्व में विवि में भ्रष्टाचार को बढ़ावा : इन नेताओं ने कहा कि राजभवन और बिहार सरकार के प्रत्यक्ष नेतृत्व में पूरे बिहार के विवि में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। आज कई दिन बीत जाने के बाद भी विवि के भ्रष्टाचार की जांच शुरू नही हुई है। जिससे साफ -साफ दिख रहा है कि भ्रष्टाचारियों को खुलेआम बिहार सरकार की समर्थन है।आईसा मांग करती है कि तत्काल बिहार सरकार और राज्यपाल को इस्तीफा दे देना चाहिए।
कुलपति व कुलसचिव का बर्खास्त किया जाना चाहिए : आइसा नेताओं में कहा कि ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति और कुलसचिव दोनों पर कई तरह के मुकदमे दर्ज है। कुलपति पर तो कई विवि में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे हैं। साथी ही साथ मिथिला विवि में भी कई तरह की अनियमितता हुई है। आईसा नेताओं ने कहा कि मिथिला विवि के कुलपति व कुलसचिव की नियुक्ति प्रक्रिया से लेकर अभी तक के कार्यकाल तक की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। तथा इन दोनों को तत्काल पद से बर्खास्त करना चाहिए।

खबरें और भी हैं...