कार्यक्रम:अयोध्या के तर्ज पर ही हो सीता की जन्मभूमि का विकास : राम माधव

दरभंगाएक महीने पहले
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मधुबनी लिटरेचर कार्यक्रम में मंचासीन अतिथि। - Dainik Bhaskar
मधुबनी लिटरेचर कार्यक्रम में मंचासीन अतिथि।
  • वेदों और उपनिषदों की प्राचीन परंपरा से जुड़े हुए विद्वानों की भूमि है मिथिला

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकारिणी सदस्य राम माधव ने कहा कि बुद्धिजीवियों और विद्वानों की भूमि मिथिला वेदों और उपनिषदों की प्राचीन परंपरा से जुड़ी हुई है। यह भूमि जगतजननी सीता की पवित्र भूमि है। अयोध्या में जिस तरह से राम जन्मभूमि का विकास हाे रहा है, उसी तर्ज पर मिथिला में सीता की जन्मभूमि का भी विकास हाे। वे मंगलवार काे मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल के तीसरे दिन ‘सीता : बियॉन्ड बाउंड्रीज’ विषय पर आयाेजित परिचर्चा काे संबाेधित कर रहे थे। उन्हाेंने कहा कि बिहार सरकार से मेरा निवेदन है कि वह सीता की जन्मभूमि का भी विकास करे।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत को एक स्त्रीवादी विचारधारा की भी जरूरत और वह विचारधारा समावेशी प्रकृति की होनी चाहिए। उन्होंने उल्लेख किया कि कैसे वाल्मीकि रामायण में अशोक वाटिका एवं जहां सीता ने अग्नि परीक्षा दी, उस स्थान का अभिनव वर्णन किया गया है। यह वातावरण और परिदृश्य उतना ही तेजस्वी है, जितना वाल्मीकि द्वारा उनके रामायण में उल्लेख किया गया है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कानून और विधि में बदलाव से बढ़कर समाज के विचारधारा में बदलाव की जरूरत है। भारत में स्त्रीवादी संवाद का इतिहास यूरोप एवं अन्य पश्चिमी देशों कि स्त्रीवादी परंपरा के इतिहास से बहुत पुराना है। पूर्वी देशों के दर्शन में नारीत्व एवं पुरुषत्व दोनों की भागीदारी समाहित है।

श्रीलंका, भारत और नेपाल को सीता के संवाद जोड़ता है : हाई कमिश्नर
श्रीलंका के हाई कमिश्नर मिलिंद मोरगुड़ा ने कहा कि मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल एक पुल का काम कर है, जो कि श्रीलंका, भारत और नेपाल को सीता के संवाद जोड़ता है। यह इस बात की सबसे बड़ी गवाही है कि कैसे सीता असलियत में, सीमाओं से इतर विषय है। इस पर विस्तार से काम होना चाहिए।

भारत-नेपाल का अंतरराष्ट्रीय संबंध किसी सीमा का मोहताज नहीं है : महंत राैशन दास
जानकी मंदिर के महंत रौशन दास ने कहा कि सीता के चरित्र, उनकी कहानी और उनके वर्णन को नेपाल में बहुत महत्ता प्रदान की जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत-नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं लॉकडाउन में भी बंद नहीं हुई। यह दोनों देशों के बीच मजबूत और गहरे संबंधों को उजागर करती। यह संबंध किसी सीमा की मोहताज नहीं है और ऐसा सीता की वजह से ही संभव हो सका है। संचालन सविता झा खान ने किया।

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