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दो साल से नहीं हो पा रहा मूल्यांकन:नैक मूल्यांकन नहीं होने से प्रभावित होंगे एलएनएमयू के विकास कार्य, ऐसे में रूसा से नहीं मिल सकेगी फंडिंग

दरभंगा6 दिन पहले
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  • डाॅक्यूमेंट्री प्रूफ जुटाने में भी हो रही परेशानी

एलएनएमयू में कोरोना के कारण तीसरे चक्र का नैक मूल्यांकन दो सालों से प्रभावित हो रहा है। इससे आने वाले समय में इस विवि के विकास कार्य बाधित होना अब सुनिश्चत होता जा रहा है। क्योंकि, मूल्यांकन के बाद ही अब रूसा से फंडिंग संभव है। इस विवि का पहला नैक मूल्यांकन 2005 में हुआ था।

इसकी अवधि 2010 में खत्म हो गई। फिर 5 साल बाद यानी 2015 में विवि का नैक मूल्यांकन तत्कालीन कुलपति प्रो. साकेत कुशवाहा ने काफी परिश्रम से कराया। हालांकि, इसका परिणाम उत्साह जनक नहीं रहा। विवि को बी ग्रेड मिला। जबकि, इसके बाद केएसडीएसयू का मूल्यांकन हुआ। इसे भी बी ग्रेड मिला। किन्तु अंक एलएनएमयू से अधिक था। इस दौरान विवि को रूसा से 20 करोड़ रुपए विकास मद में मिला। लेकिन, विवि को ए ग्रेड नहीं मिलने के कारण डीडीई में अब नामांकन बंद हो चुका है।

यूजीसी दूरस्थ शिक्षा ब्यूरो के निर्णय के मुताबिक मूल्यांकन में ए ग्रेड आने के बाद ही यहां नामांकन शुरू हो सकता है। इस विवि में 2020 नैक मूल्यांकन की अवधि खत्म हो चुकी है। विवि के ऊपर अपना समेत क्षेत्राधीन शैक्षणिक संस्थानों का भी नैक मूल्यांकन कराने की जिम्मेदारी होती है। लेकिन, अभी तो स्वयं विवि इसमें पिछड़ा हुआ है। विवि के आईक्यूएसी विभाग नैक मूल्यांकन को लेकर अभी डाॅक्यूमेंट्री प्रूफ जुटाने में लगा है। इस विवि को 2013-14 से ही डाॅक्यूमेंट्री प्रूफ जमा करना होगा। जिसको जुटाने में काफी परेशानी होगी।

नैक मूल्यांकन में डाॅक्यूमेंट्री प्रूफ का बढ़ा महत्व

नैक के लिये ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन में पंजीकरण आवश्यक होता है। प्रत्येक वर्ष पोर्टल पर डाटा एंट्री करने की आवश्यकता होती है। पूरे बिहार में 18-19 में 33 उच्च शिक्षण संस्थान में 33 ने डीसीएफ वन की डाटा एंट्री की थी। 2019-20 में 35 में 31 ने की थी। जिसमें यह विवि सबसे आगे था। जिसके कारण बिहार में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था। नैक मूल्यांकन में डाक्यूमेंट्री प्रूफ का महत्व बढ़ता जा रहा है। 1000 अंक के मूल्यांकन में 700 अंक का कंप्यूटर बेस्ट मूल्यांकन होता है। जिसमें डाक्यूमेंट्री प्रूफ ही सबसे अधिक उपयोगी है। 300 अंक के लिए पियर टीम आकर मूल्यांकन करती है। इसलिए नैक के बाद जो संस्थान अगले 5 साल के बाद प्रक्रिया शुरू करगी तो उसे परेशानी होगी। अब मूल्यांकन एक सतत प्रक्रिया बन चुकी है।

सेल्फ स्टडी रिपोर्ट की हो रही तैयारी : प्रो. एनके अग्रवाल

विवि के आईक्यूएसी निदेशक प्रो. एनके अग्रवाल ने बताया कि नैक की तैयारी शुरू कर दी गई थी। सभी कार्यक्रम बन चुके थे। प्रो. एसके सिंह व प्रो. डॉली सिन्हा लगातार निगरानी कर रहे हैं। इस बीच कोरोना ने अपने नए तरीके से हमला कर दिया। इसके कारण तेज गति से चल रहे सभी कार्यक्रम पर अचानक ब्रेक लग गया है। सेल्फ स्टडी रिपोर्ट की तैयारी की जा रही है।

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