महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई:‘मैथिली सिनेमा दूसरे प्रांतीय सिनेमा- मराठी, बंगाली व भोजपुरी के स्तर को कैसे छू सकता है’ इस पर चर्चा हुई

दरभंगाएक महीने पहले
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मधुबनी लिटरेचर कार्यक्रम में शामिल संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति व अन्य। - Dainik Bhaskar
मधुबनी लिटरेचर कार्यक्रम में शामिल संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति व अन्य।
  • मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन विविध कार्यक्रम का किया गया आयाेजन

चार दिवसीय मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल का दूसरा दिन संस्कृत विवि के कुलपति प्रो. शशिनाथ झा की उपस्थिति में शुरू हुआ। दूसरे दिन सोमवार को समिति की ओर से विभिन्न शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कुलपति ने कहा कि मिथिला का शैक्षणिक व सांस्कृतिक इतिहास काफी समृद्ध है। महोत्सव के पहले सत्र मैथिली टॉकीज में श्याम भास्कर एवं सत्येंद्र झा द्वारा मैथिली सिनेमा के इतिहास और उसके उत्थान के लिए महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। सत्र में इस विषय पर चर्चा की गई कि कैसे मैथिली सिनेमा दूसरे प्रांतीय सिनेमा जैसे कि मराठी, बंगाली एवं भोजपुरी के स्तर को छू सकता है।

इसके बाद दूसरे सत्र में रामनाथ झा, सुशांत मिश्र, उपासना सिंह एवं बिनयानन्द की ओर से माटी के दर्शन कार्यक्रम में मिथिला की धरती के दार्शनिक इतिहास पर प्रकाश डाला गया। जेएनयू के प्रो रामनाथ झा ने कहा कि कैसे अध्यात्म और शिक्षा हमेशा से ही मिथिला के महत्वपूर्ण भाग रहे हैं, इसके साथ ही उन्होंने संविधान, हिन्दू कोड बिल आदि में मिथिला के लोगों के अभूतपूर्व योगदान की भी चर्चा की। मनिंद्र ठाकुर, मिथिलेश झा, प्रदीप चौधरी, भोगी महतो एवं श्रीश चौधरी द्वारा आश्रम नामक तीसरे सत्र में गांधीवादी विचारों पर चर्चा की गयी। निवेदिता झा एवं माला झा द्वारा स्त्री दलान में मिथिला के इतिहास में स्त्रियों की मुख्य भूमिका को उजागर किया गया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन
साहित्यिक महोत्सव के अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। बच्चों के लिए बाल सहिति एवं युवाओं के लिए युवा सहिति का आयोजन किया गया। इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सीएम साइंस कॉलेज के छात्र-छात्राओं की ओर से बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया गया। इसके बाद पदमश्री पंडित राम गोपाल बजाज एवं कनुप्रिया पंडित द्वारा जइ से पहिने: सिया पिया कथा का नाट्य पाठ किया गया।

सीता के 250 स्वरूपों काे दर्शाती नजर आई मधुबनी पेंटिंग
सीता के 150 स्वरूपों को दर्शाती मधुबनी पेंटिंग वैदेही लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रही। कार्यक्रम के अंतिम सत्र में कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न कोनों से आए कवियों की कविताओं के साथ दूसरे दिन के कार्यक्रमों का समापन हुआ।

छात्र-छात्राओं ने अपनी कला प्रतिभा का किया प्रदर्शन
इस माैके पर विभिन्न स्कूलों एवं कॉलेजों के छात्र-छात्राओं ने जमकर अपनी कला प्रतिभा का प्रदर्शन किया। सीएम साइंस कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने जहां एकांकी, लोक नृत्य, समूह नृत्य एवं कविता पाठ व तबला वादन आदि में अपनी बेहतर प्रस्तुति दी। वहीं, माउंट समर स्कूल की नन्हे मुन्ने कलाकारों ने अपनी चुलबुली अदाओं से दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। माउंट समर स्कूल के श्रेया झा, टिया रानी, विद्या कुमारी, पल्लवी झा ने महिषासुर नामक राक्षस का वध करने के लिए प्रकट हुए आदिशक्ति की स्वरूप महिषासुरमर्दिनि देवी की मनमोहक जीवंत प्रस्तुति से उपस्थित जनसमूह को भाव विभोर कर दिया।

मालूम हो कि शास्त्रों में कहा गया है कि अनेकों वरदान प्राप्त शक्तिशाली राक्षस महिषासुर एक बार देवों पर विजय पाने के मन से आक्रमण कर दिया। जब देव उसे परास्त नहीं कर पाएं तो वे देवी आदि शक्ति के शरण में जाकर उनकी स्तुति करने लगें। फलस्वरूप देवी का एक दिव्य रूप प्रकट हुआ और उन्होंने असुरराज महिषासुर का वध कर देवों को भय मुक्त किया। तत्पश्चात देवताओं ने “ अयि गिरिनन्दिनी......शैलसुते।” की स्तुति से मां को प्रसन्न किया।

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