कार्यक्रम आयोजन:डॉ. सुरेंद्र बोले- भारतीय क्रांति व जनांदोलन के बड़े साहित्यकार थे जनकवि नागार्जुन, शोषण, उत्पीड़न व दमन पर किया प्रहार

दरभंगाएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
बाबा नागार्जुन की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते लोग। - Dainik Bhaskar
बाबा नागार्जुन की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते लोग।

नागार्जुन नगर, कबीरचक अवस्थित देवकी निवास पर जनसंस्कृति मंच की ओर से शुक्रवार को शिद्दत से जनकवि बाबा नागार्जुन याद किए गए। मौके पर साहित्यकार एवं जनसंस्कृति मंच के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद सुमन ने कहा कि जनकवि नागार्जुन भारतीय क्रांति के उद्गाता जनांदोलन के बड़े साहित्यकार हैं।

प्रगति, समता और जनवाद के सपने को साकार करने के लिए नागार्जुन ने शोषण, उत्पीड़न और दमन पर आधारित सत्ता से सीधा मुठभेड़ करते हुए जनांदोलनों में भाग लिया एवं जल यात्रा की। उन्होंने चार भाषाओं- संस्कृत, हिंदी, बंगला और मैथिली में साहित्य सृजन किया। उनका पूरा साहित्य शोषित-पीड़ित आम आवाम की वास्तविक मुक्ति के लिए समर्पित है।

मौके पर जनसंस्कृति मंच के जिला सचिव डॉ. रामबाबू आर्य, एलसीएस कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. मिथिलेश कुमार यादव, पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. राम अवतार यादव, डॉ अजय कलाकार, रामनारायण पासवान उर्फ भोला, शिक्षक पवन कुमार यादव, शिक्षिका बबीता कुमारी, जिजीविषा सुमन, पीयूष, मुकेश कुमार, अभिषेक कुमार, संतोष कुमार, अमर कुमार और नीतीश कुमार ने भी अपने-अपने विचार रखे।

नागार्जुन विलक्षण कवि थे : डॉ. बैजू
नागार्जुन वास्तव में जनता की व्यापक राजनीतिक आकांक्षा से जुड़े विलक्षण कवि थे। जिनका विभिन्न भाषाओं पर न सिर्फ गजब का एकाधिकार था बल्कि, उनकी रचनाओं में देशी बोली के ठेठ शब्दों से लेकर संस्कृतनिष्ठ शास्त्रीय पदावली तक उनकी भाषा के अनेक स्तर थे। ये बातें विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉ. बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने शुक्रवार को बाबा नागार्जुन की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में कही।

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. महेन्द्र नारायण राम ने कहा कि लोक शक्ति के उपासक बाबा नागार्जुन मूलतः विपक्ष के कवि थे। मौके पर प्रो. जीवकांत मिश्र, दुर्गा कांत झा ने भी संबोधित किया। मिथिला विकास संघ की ओर से कामेश्वर नगर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।

खबरें और भी हैं...