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आयोजन:डॉ. मोहन मिश्र की वजह से मिथिला समेत सूबे में कालाजार बीमारी का उन्मूलन हुआ : प्रो. उदय

दरभंगा2 महीने पहले
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पद्मश्री डॉ. मोहन मिश्रा के निधन पर शोक सभा करते माले नेता। - Dainik Bhaskar
पद्मश्री डॉ. मोहन मिश्रा के निधन पर शोक सभा करते माले नेता।
  • मैथिली लोक संस्कृति मंच लहेरियासराय के तत्वावधान में ऑनलाइन हुई श्रद्धांजलि सभा

मैथिली लोक संस्कृति मंच लहेरियासराय के तत्वावधान में करोना नियम के तहत ऑनलाइन श्रद्धांजलि अर्पित किया गया पद्मश्री डॉ मोहन मिश्र को। मालूम हो कि डाॅ मोहन मिश्र इंग्लैंड से एमआरसीपी किया था। कालाजार बीमारी के लिए फंगी जोन दवा के लिए वह काफी चर्चित हुए थे। कालाजार बिमारी का उन्मूलन मिथिला समेत बिहार में हुआ। इसके लिए इन्हें चिकित्सा के क्षेत्र में अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान मिला। जल के आर्सेनिक के मुक्ति के लिए अपने पुत्र ई नरोत्तम मिश्रा के संग फिटकरी से शुद्ध करने का उपाय सुझाए। इन्होंने कई पुस्तकों का लेखन एवं प्रकाशन करवाया जो अमरीका में छपा था। ये बातें मैथिली लोक संस्कृति मंच के महासचिव प्रो उदय शंकर मिश्र ने कही। प्रो मिश्र ने कहा कि मिथिलांचल विकास मंच एवं मिथिला राज्य अभियान में उनके के साथ दशकों तक काम करने का मौका मिला। उधर, समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी ने गहरी शोक संवेदना प्रकट की है। उन्होंने कहा कि उनका निधन चिकित्सा जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। डीएमसीएच में मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने कालाजार पर शोध किया था। इनके लिए उन्हें 2014 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। मंत्री ने कहा कि वे मिथिलावासियों के लिए डॉक्टर नहीं, भगवान तुल्य थे। मिथिला के लिए यह अपूरणीय क्षति है। इसकी भरपाई संभव नहीं है।

इन लोगों ने शोक श्रद्धांजलि अर्पित किया | श्रद्धांजलि व्यक्त करने वालों में डाॅ चंद्रकांत मिश्र, पं राम नारायण झा, डाॅ अयोध्या नाथ झा, चंद्रेश राम कुमार, बासुकीनाथ झा, प्रो सुधीर कुमार झा, अमर कुमार मिश्र, मिथिलेश ठाकुर, ममता ठाकुर, डाॅ विश्वनाथ झा, डाॅ उमेश चौधरी, डाॅ राजीव कुमार झा, डाॅ चौधरी हेमचंद्र राय, डाॅ उमेश झा, सफी अहमद, तरुण मंडल आदि ने शोक श्रद्धांजलि अर्पित किया।

रात में हुई थी बात, सुबह निधन से स्तब्ध हूं : सांसद

दरभंगा| भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष, डीएमसीएच के मेडिसिन विभाग के पूर्व अध्यक्ष, प्रसिद्ध फिजिशियन व चिकित्सक ‘पद्मश्री’ डॉ. मोहन मिश्र के निधन पर सांसद गोपाल जी ठाकुर ने गहरा शोक व्यक्त किया। सांसद ने कहा कि कल (गुरुवार) रात 7 बजकर 30 मिनट पर डॉ. मोहन मिश्र जी दूरभाष पर बात हुई, मैंने उनका कुशल क्षेम जाना, उन्होंने कहा कि मैं ठीक हूं आप कैसे हो। सांसद ठाकुर ने कहा आज सुबह उनके आकस्मिक निधन का समाचार सुनकर स्तब्ध हो गया। उन्होंने कहा कि उनका निधन चिकित्सा जगत के लिए अपूरणीय क्षति है और मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है।

विसेरल लीशमैनियासिस पर अध्ययन को माना गया उल्लेखनीय योगदान

विसेरल लीशमैनियासिस पर डॉ. मोहन मिश्रा के अध्ययन को कई लोग उनके सबसे उल्लेखनीय योगदान के रूप में मानते हैं। लीशमैनियासिस, मलेरिया के बाद दूसरा सबसे बड़ा परजीवी हत्यारा और स्थानीय रूप से कालाजार के रूप में जाना जाता है। इस क्षेत्र में एक आम बीमारी थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से वित्त पोषित व्यापक शोध के बाद डॉ. मिश्रा ने एम्फोटेरिसिन बी के उपयोग का प्रस्ताव दिया। फंगिज़ोन 1991 में लैंसेट में प्रकाशित एक लेख के माध्यम से बीमारी का मुकाबला करने के लिए। प्रस्ताव को एक अग्रणी के रूप में माना जाता है।

कालाजार के इलाज के लिए दुनिया भर में सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला औषधि है। डॉ. मिश्र को पेयजल में आर्सेनिक पर शोध का श्रेय भी दिया जाता है। उनके बेटा नरोत्तम मिश्रा जो कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में एक सूचना वैज्ञानिक हैं, की सहायता से इस विषय पर उनकी पढ़ाई, भोजन-ग्रेड का उपयोग करके पीने के पानी से आर्सेनिक को खत्म करने के लिए एक किफायती तरीका खोजने में सफलता प्राप्त की। उन्होंने दिखाया है कि भारत में पारंपरिक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली एक जड़ी बूटी ब्राह्मी (बकोपा मोननेरी), डिमेंशिया के उपचार में प्रभावी हो सकती है।

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