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नीयम का पालन:बाढ़ और महामारी के बीच अकीदत से अदा की गई ईद-उल-अजहा की नमाज

दरभंगा10 दिन पहले
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  • नियम का पालन : शहर की चुनिंदा मस्जिदों में कुछ लोगों ने ही पढ़ी नमाज

बाढ़ एवं कोरोना महामारी के बीच शनिवार को त्याग समर्पण एवं बलिदान का महापर्व ईद उल अजहा लोगों ने नमाज अदा करके एवं जानवरों की कुर्बानी देकर मनाया। कोरोना महामारी के लिए बंद किए गए इबादतगाहों की जगह अधिकतर लोगों ने घरों में छोटी-छोटी जमातों में ईद उल अजहा की नमाज परिजनों के साथ अदा की। हालांकि शहर की चुनिंदा मस्जिदों में फिजिकल डिस्टेंस का पालन करते हुए भी लोगों ने ईद की नमाज अदा की। इस बीच लोगों ने फिजिकल डिस्टेंस का पालन करते हुए न तो हाथ मिलाया और न ही गले मिलकर मुबारकबाद दी।

जिन मस्जिदों में ईद की नमाज अदा की गई वहां लोगों का पहुंचना अप्रत्याशित था यही कारण था कि मस्जिदों के इमाम ने लोगों को फिजिकल डिस्टेंस मेंटेन करने के साथ ही गले मिलने एवं मुसाफा करने से मना करना पड़ा। कोरोना वायरस के कारण ईद और बकरीद के मौके पर बच्चों की खुशियां और चहक गायब थी। ईद के समय मस्जिद एवं ईदगाहों के निकट लगने वाले मेला ने घूमने और पसंदीदा मिठाई व खिलौने की खरीदारी से वंचित रहना पड़ा।

बाकरगंज की जामा मस्जिद किलाघाट की शाही जमा मस्जिद मुफ्ती मोहल्ला की जामा मस्जिद एवं कटकी बाजार जामा मस्जिद में ईद के मौके पर हजारों लोग दूरदराज से नमाज अदा करने पहुंचे थे। रहमगंज, करमगंज, दुमदूमा, मोहल्ला शेर मोहम्मद, भीगो, अलीनगर, कादिराबाद आदि मोहल्ले में 15 से 25 लोगों ने जमात के साथ नमाज अदा की।ईद-उल-अजहा का संदेश : बाकरगंज जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मो. मंजर कासमी ने कहा कि कुर्बानी अल्लाह के सामने लोगों का बलिदान एवं समर्पण के भाव को कहते हैं। कुर्बानी इब्राहिम (अ. स.) की सुन्नत है। इब्राहिम (अ. स) ने अपने प्यारे बेटे को अल्लाह के हुक्म पर बलिदान कर दिया था। अल्लाह को उनका समर्पण भाव बहुत पसंद आया। यही कारण है कि अल्लाह ने इस्लाम के 5 फर्ज में से एक करार दिया है।

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