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वेबिनार:‘मिथिला के कण-कण में ईश्वर व जन-जन में ज्ञान-विज्ञान का वास’

दरभंगा13 दिन पहले
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  • सीएम कॉलेज व माय होम इंडिया ने आयोजित किया वेबिनार

मिथिला विश्व की सर्वाधिक मधुर भाषी क्षेत्र है। इसके कण-कण में ईश्वर तथा जन-जन में ज्ञान-विज्ञान का वास है। प्राचीन काल से ही भारत शिक्षा, संस्कृति और संस्कार के लिए प्रसिद्ध रहा है। मिथिला क्षेत्र की सभ्यता व संस्कृति इतनी विकसित थी कि देवगण भी लालायित रहते थे। बिस्फी के विकास में अनेक चुनौतियां हैं। हमें मिलकर इसे आगे बढ़ाना है।

बिस्फी के विधायक हरिभूषण ठाकुर ने सीएम कॉलेज व माय होम इंडिया, मुंबई के संयुक्त तत्वावधान में कविकोकिल विद्यापति की जन्मस्थली बिस्फी : मुद्दे एवं चुनौतियां विषयक वेबिनार में रविवार को ये बातें कहीं। पूर्व विधान पार्षद कामेश्वर चौपाल ने कहा कि संपूर्ण मिथिला तपोभूमि है। जहां सीता-जन्मस्थली, शक्तिपीठ उज्जैन, अहिल्यास्थान, गौतम आश्रम, यगवनस्थल व विद्यापति जन्मस्थली बिस्फी आदि का अपना खास महत्व है। जहां से हमेशा ज्ञान-विज्ञान का प्रकाश मिलता रहा है। हमारी चेतना का केंद्र बिंदु बिस्फी का विकास महत्वपूर्ण तीर्थस्थल की तरह होना चाहिए।

उत्तम शिक्षा, निस्वार्थ सेवा, समुचित संस्कार व बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था ही इसका विकास होगा। पूर्व प्राचार्य प्रो. विद्यानाथ झा कहा बिस्फी में विद्यापति स्मारक व साहित्यिक माहौल बनाने की जरूरत है। मौके पर सामाजिक चिंतक एवं उत्तर पूर्व क्षेत्र के प्रचारक रामनवमी प्रसाद, प्राचार्य प्रो. विश्वनाथ झा, डॉ. जयप्रकाश नारायण, डाॅ. प्रवीण शेखर झा, डाॅ. शंभू मंडल, डाॅ. शिशिर कुमार झा, राबिया ठाकुर आदि ने विचार रखे।

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