वेबिनार / ‘श्रम व व्यय कम हो इसके लिए मानव ने हर चीज के मूल स्वरूप को ही बदल दिया’

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दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

दरभंगा. एलएनएमयू के पीजी राजनीति विज्ञान विभाग में मंगलवार को मानव के सामाजिकीकरण की भारतीय-वैदिक योजना विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन कराया गया। मुख्य वक्ता गुजरात विवि के संस्कृत विभाग निदेशक सह अध्यक्ष प्रो. कमलेश कुमार ने कहा कि मानव के सामाजिकीकरण की भारतीय-वैदिक योजना यह विषय मौजूदा दौर व राजनीति दोनों के लिये काफी प्रासंगिक है। मौजूदा दौर में मानव सामाजिकीकरण की जगह व्यवसायीकरण ने ले लिया है। मानवीय प्रवृति ही ऐसी हो गई है कि मानवीय श्रम व व्यय कम हो और लाभ अधिक हो इसके लिये उसने हर चीज के मूल स्वरूप को ही बदल दिया है।

मानव क्या है इसकी परिभाषा आज सामान्यतया मानव को भी पता नहीं है। मौजूदा दौर में मानव आकृति को मानव माना गया है। इसी पहचान के आधार पर मानवाधिकार का नारा दिया गया है। लेकिन जब मानव अपने मूल स्वरूप मानव के रूप में है ही नहीं फिर ऐसे मानवों के लिये मानवाधिकार का क्या लाभ। उन्होंने कहा कि पहले मानव को मानव दर्शन का बोध कराएं। फिर मानवाधिकार की बात करना चाहिये। मनुष्य वह है जो विचार करके किसी काम को करे। नमः व स्वाहा शब्द के वास्तविक स्वरूप को जानने के बाद ही मानव को सामाजिकीकरण की बात समझ में आ जाएगा।

हिंसावादी संस्कृति के कारण असामाजिकीकरण को मिल रहा है बढ़ावा : प्रो. प्रभाकर पाठक 
अध्यक्षीय संबोधन में व पूर्व मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. प्रभाकर पाठक ने भतृहरि, दधीचि, राहुल सांकृत्यायन, मैथिली शरण गुप्त, दिनकर आदि को रेफरेंस देते हुए कहा कि आज की संस्कृति हिंसा को प्रश्रय देती है। मौजूदा दौर में मानव के सामाजिकीकरण की जगह असामाजिकीकरण ने ले लिया है। मौजूदा दौर कट्टरवाद से भी आगे पक्षवाद से लेकर हठवाद तक पहुंच गया है। जिसने हिंदुस्तान को भी चपेटे में लेने की कोशिश की है। लेकिन, हिंदुस्तान का वर्तमान प्रधान सेवक पीएम मोदी अभिमन्यु नहीं अर्जुन है जो हर चक्रव्यूह को भेदना जानता है और यकीनन भेद भी रहा है। सब तरफ से उन्हें घेरा जा रहा है।

मानव को उसके मूल मकसद से भटकने से रोकता है धर्मशास्त्र : प्रो. जितेंद्र नारायण
विभागाध्यक्ष प्रो. जितेंद्र नारायण ने कहा कि व्यक्ति व परिवार से ज्यादा समाज की प्रतिबिंब महत्वपूर्ण है। हमारा धर्मशास्त्र कभी हमें मूल मकसद से भटकने नहीं देता है। हमारा धर्म कहता है कि धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो व विश्व का कल्याण हो। इसीलिए हर व्यक्ति को अपने-अपने धर्म का पालन करना चाहिए। उसके मूल को आत्मसात करना चाहिए। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. मुनेश्वर यादव ने किया।

इग्नू के जुलाई सत्र में 31 तक ऑनलाइन नामांकन : निदेशक

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय में जुलाई 2020 सत्र के लिए ऑनलाइन नामांकन जारी है एवं नामांकन फार्म जमा करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। क्षेत्रीय निदेशक डॉ. शंभु शरण सिंह ने बताया कि ऑनलाइन प्रवेश पोर्टल के माध्यम से छात्र स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा एवं प्रमाण पत्र कार्यक्रमों में नामांकन करा सकते हैं। प्रवेश के लिए छात्रों को वेबसाइट पर पंजीकृत करवाना होगा। सभी अभिलेखों या दस्तावेजों की स्कैंड कॉपी दिए गए लिंक में अपलोड करने के पश्चात क्रेडिट-डेबिट कार्ड के माध्यम से नामांकन शुल्क का भुगतान किया जा सकता है। अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए नामांकन में छूट की सुविधा प्रदान की गई है। लेकिन, सभी कार्यक्रमों के लिए उन्हें यह सुविधा नहीं दी गई है।

जिन कार्यक्रमों में नामांकन के लिए छूट प्रदान की गई है उनकी सूची विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है। इग्नू क्षेत्रीय केंद्र के अंतर्गत दरभंगा, समस्तीपुर, बेगूसराय, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी व मधुबनी जिलों के छात्र विभिन्न पाठ्यक्रमों में अपने निकटतम अध्ययन केंद्र के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन नामांकन की प्रक्रिया होने के कारण अभ्यर्थियों को क्षेत्रीय केंद्र या अध्ययन केंद्र आने की आवश्यकता नहीं है। ऑनलाइन नामांकन की प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात अभ्यर्थी अपने लॉगइन आईडी एवं पासवर्ड के माध्यम से अपना परिचय पत्र डाउनलोड कर सकते हैं।

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