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  • Janaki Devi Of Ratanpur In Jale Block Was Undergoing Treatment With A Doctor In Muzaffarpur, Then Her Son Rajiv Took Her To Be Seen There, She Was Admitted To SKMCH When She Came To Corona Positive In The Investigation.

संक्रमण की चेन:जाले प्रखंड के रतनपुर की जानकी देवी मुजफ्फरपुर के डॉक्टर से इलाज करा रही थी, तबीयत बिगड़ी तो बेटा राजीव वहां दिखलाने ले गया, जांच में कोरोना पॉजिटिव आई तो उन्हें एसकेएमसीएच में भर्ती कराया गया था

दरभंगा6 महीने पहले
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  • बेटा हाे ताे ऐसा, मुझे काेराेना से जीत दिला दिया लेकिन बताया तक नहीं कि तुम पाॅजिटिव हाे, रिपोर्ट निगेटिव आई तब बताया, आप भी मरीजों का मनोबल बढ़ाएं

मैं जाले प्रखंड की रतनपुर पंचायत के वार्ड 9 की रहने वाली हूं। ग्रामीण महिला हूं। सत्तू का उद्याेग है। मेरी उम्र 67 है। लंबे समय से डायबिटीज हूं। मुजफ्फरपुर के जूरन छपरा स्थित डॉ. अशोक मिश्रा से मेरा इलाज चल रहा है। 16 अप्रैल काे चेकअप करवाने बेटे के साथ डाॅ. अशाेक मिश्र के यहां गई थी। इलाज करवा कर जब वह घर लौटी, तो तबीयत और भी अधिक बिगड़ती चली गई। बेटा राजीव कुमार ने 24 अप्रैल की सुबह उन्हें आनन-फानन में मुजफ्फरपुर स्थित प्रशांत हॉस्पिटल में भर्ती कराया। जहां जांच के दौरान वह कोरोना पॉजिटिव निकली। वहां से मुझे एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर में भर्ती करवाया गया। बेटा राजीव कुमार मेरे साथ रहा। लेकिन उसने मुझे यह नहीं कहा कि तुम काेराेना पाॅजिटिव हाे। अामताैर पर परिजन दूरी बना लेते हैं लेकिन मेरा बेटा हर पल मुझे साथ दिया।

मेरी देखभाल की। नियमित रूप से मुझे गर्म पानी, गर्म दूध में हल्दी डालकर पिलाते रहा। 27 अप्रैल को मेरी दाेबारा जांच हुई ताे वह उसकी रिपाेर्ट निगेटिव अाई। इस दौरान मेरा शुगर का लेवल 592 था, बावजूद मैं काेराेना से जंग जीत ली। तब मुझे बेटे ने बताया कि तुम काेराेना पाॅजिटिव थी। मेरी लाेगाें से अपील है कि सभी लाेग काेराेना गाइडलाइंस का पालन कीजिए।

अगर आपके परिवार का काेई सदस्य काेराेना पाॅजिटिव हाे जाते हैं ताे घबराएं नहीं। उनका साथ दीजिए अाैर उनका बेहतर इलाज करवाइए। आपके परिजन भी मेरी तरह ठीक हाे जाएंगे। काेराेना पीड़िताें का साथ दें, उन्हें छोड़ें नहीं। अापका साथ उनके मनाेबल का बढ़ाएगा अाैर वे जल्दी ठीक काे जाएंगे। कोरोना संक्रमिताें का उनके परिवार काे सहयाेग व सही देखभाल नहीं किए जाने के वजह से उनकी मौत हो रही है। कोरोना से जंग जीतने के लिए सबसे जरूरी अपनों का साथ होता है। जब मैं एसकेएमसीएच में भर्ती थी तो वहां कई ऐसे मरीज दिखे जिनके परिजन संक्रमितों को देखकर ही दूर भाग रहे थे। ऐसा करने वाले परिजनों के अधिकांश मरीजों ने उनके सामने ही दम तोड़ दिया। मैं तो ग्रामीण महिला हूं।

बावजूद पिछले एक साल से कोरोना के खौफ से इतनी सीख जरूर मिली है कि कोरोना को हराने के लिए संक्रमण की चेन को तोड़ने की जरूरत है। यह तभी संभव होगा जब इसे तोड़ने के लिए सभी संकल्प लेंगे। जब तक कोई बहुत बड़ी इमरजेंसी न हो घर से मत निकलिए। आसपड़ोस के लोगों से सिर्फ फोन के जरिए संपर्क कीजिए। मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन जरूर कीजिए। प्रस्तुति : वेद प्रकाश ठाकुर

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