गीता जयंती आयोजित:गीता ज्ञान से मनुष्य में सद्कर्म की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलता है, सबको आत्मसात करना चाहिए : शशिनाथ

दरभंगाएक महीने पहले
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बेनीपुर के हावीभौआड़ गांव में गीता दिवस के अवसर पर भाग लेते लोग। - Dainik Bhaskar
बेनीपुर के हावीभौआड़ गांव में गीता दिवस के अवसर पर भाग लेते लोग।
  • बेनीपुर के हावीभौआड़ गांव में गीता दिवस के अवसर पर सैकड़ों लोगों ने लिया भाग

कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति शशि नाथ झा ने कहा कि गीता के ज्ञान से मनुष्य में सद्कर्म की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलता है। वे मंगलवार को पंडित गेनालाल चौधरी स्मृति व्याख्यान माला के अन्तर्गत मध्य विद्यालय हावीभौआड़ में संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति रामचन्द्र झा की अध्यक्षता में आयोजित गीता जयंती को संबोधित कर रहे थे। विधायक प्रो विनय कुमार चौधरी उर्फ अजय ने कहा कि संस्कृत शिक्षा के उत्थान के लिए प्रयास करने की जरूरत है। रोजगार के दृष्टिकोण से संस्कृत शिक्षा सबसे उपयुक्त है। प्रो जयशंकर झा ने कहा कि की गीता गीता रटने से ही शोक, मोह और भय का नष्ट हो जाता है। गीता त्याग सिखाती है। प्रो राजीव रंजन सिंह ने कहा कि गीता में कृष्ण मुक्त आत्मा की बात करते हैं। व्यक्ति को कर्म और ज्ञान का भेद सीखता है। दुखों से निवृत्ति को सीखता है। डॉ वौआनन्द झा ने कहा कि गीता लोगों को कर्म की प्रति निष्ठा को दर्शाता है ताकि कर्म का भेद समझ सके।
भोग के संस्कार को योग की तरफ बदलना ही गीता का ज्ञान है : गुप्तेश्वर पांडेय| पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा कि स्वभाव पर विजय ही सबसे बड़ा विजय है। भोग के संस्कार को योग की तरफ बदलना ही गीता का ज्ञान है। कार्यक्रम के समन्वयक वीरचंद झा ने कहा कि गीता के ज्ञान के लिए मिथिला में पुनर्जागरण की आवश्यकता है।  इसलिए ऐसे कार्यक्रम होते रहना आवश्यक है। इस मौके डॉ सोमेश्वर नाथ झा दधीच, सुनीता कुमारी, जीवनाथ झा, श्रीकांत मिश्र, सीताराम झा, विमल झा, हरमोहन झा, विद्या नन्द ठाकुर आदि लोगों ने अपना अपना विचार व्यक्त किया। मंच संचालन डॉ दिलीप कुमार झा एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर देवेन्द्र झा ने किया।

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