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श्रीराम काव्यपाठ प्रतियोगिता:कविता लिखने-पढ़ने वाले कवि की ही तरह सुनने वाले भी होते हैं महत्वपूर्ण- प्रो. प्रभाकर पाठक

दरभंगा6 दिन पहले
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  • उदय शंकर चौधरी-प्रथम, विनोद कुमार-द्वितीय व आदित्य आनंद तृतीय स्थान पर रहे

काव्य-गंगा हम सब का कल्याण करती है। सभी छोटे-बड़े व्यक्ति तुलसीदल की तरह योग्य होते हैं। वैसे योग्य कवि बनना कठिन होता है, जिसके लिए काव्य- रचना का उचित वातावरण बनाना जरूरी है।अनवरत अभ्यास से भी कविता-सृजन संभव है। एलएनएमयू के पूर्व मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. प्रभाकर पाठक ने सीएम कॉलेज में रविवार को आयोजित राष्ट्रीय कवि संगम ये बातें कहीं।

सीएम कॉलेज, इग्नू व एलुमुनाई एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित श्रीराम काव्य-पाठ प्रतियोगिता-2021 में प्रो. पाठक ने कहा कि कविता लिखने-पढ़ने वाले कवि की ही तरह कविता का रसास्वादन करने वाले भी महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने प्राचार्य प्रो. विश्वनाथ झा के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि हमें इनकी तरह ही हमेशा दुःसाहसी की जगह सत्साहसी बनना चाहिए।

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