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वेबिनार:संस्कृत रूपी मंजूषा में सुरक्षित है हमारी संस्कृति, भाषा में समाहित है विश्व कल्याण की संभावना : डाॅ. जयशंकर झा

दरभंगा7 दिन पहले
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  • सीएम कॉलेज में संस्कृत सप्ताह को लक्ष्य कर संस्कृत भाषा एवं भारतीय संस्कृति विषय पर हुआ वेबिनार
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संस्कृत भाषा एवं भारतीय संस्कृति से ही भारत की व्यापक प्रतिष्ठा है। हमारी संस्कृति संस्कृत रूपी मंजूषा में सुरक्षित है। संस्कृत भाषा एवं भारतीय संस्कृति से ही पूरे देश एवं विदेश का कल्याण संभव है। एलएनएमयू में पीजी संस्कृत विभाग के प्राध्यापक डाॅ. जयशंकर झा ने सीएम कॉलेज के संस्कृत विभाग की ओर से संस्कृत सप्ताह के पहले दिन शनिवार को ये बातें कहीं। संस्कृत भाषा एवं भारतीय संस्कृति विषयक वेबिनार में उन्होंने कहा कि सुपर कंप्यूटर के लिए संस्कृत सर्वाधिक वैज्ञानिक एवं उपयोगी भाषा है। नई शिक्षा नीति के तहत अब संस्कृत की पढ़ाई आईआईटी जैसे संस्थानों में भी होगी। सामाजिक सरोकार की भाषा बनाना जरूरी : प्रो. जीवानंद झा| पीजी संस्कृत के विभागाध्यक्ष प्रो. जीवानंद झा ने कहा कि संस्कृत भाषा हमारी संस्कृति का आधार स्तंभ है। संस्कृत को मानवीय संस्कार एवं सामाजिक सरोकार की भाषा बनाए जाने से ही लोगों का कल्याण होगा। मुजफ्फरपुर से डाॅ. बालकृष्ण शर्मा, मधुबनी से डाॅ. दिलीप कुमार झा, भुवनेश्वर से राहुल कुमार मंडल, समस्तीपुर से डाॅ. ममता सिंह, बेगूसराय से डाॅ. अर्चना कुमारी, वैशाली से प्रो. रामनाथ सिंह, मारवाड़ी कॉलेज से डाॅ. विकास कुमार, सीएम कॉलेज के संस्कृत विभागाध्यक्ष डाॅ. आरएन चौरसिया, मधुबनी से डाॅ. मनमोहन झा, डाॅ. विद्या कुमारी, कुमारी पूनम मंडल, जीएस साहुकार, दीपक कुमार, सुभाष कुमार, शशि शेखर,कुमार सौरभ, रवि कुमार,अमरजीत कुमार, कमलेश कु. साह, अभिषेक कुमार, पंकज कुमार,नीली रानी, संतोष कुमार, श्रवण कुमार, जय झा, राजा मंडल, प्रत्यूष नारायण, कुमार अनुराग, पंकज कुमार, श्रेया कुमारी, कमलेश सहनी, शशि शेखर, राजेंद्र कुमार, राजेश कुमार,सज्जन कुमार, पप्पू कुमार, सुमित कुमार सिंह, डाॅ. माधवी कुमारी, डाॅ. प्रभा व राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय से डाॅ. सुमित कुमार मंडन सहित अनेक प्रतिभागियों ने भाग लिए।

भारतीय संस्कृति सर्व कल्याणकारी : प्रो. रामनाथ
उद्घाटन संबोधन में पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. रामनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति सर्व कल्याणकारी है। जिसमें विश्व बंधुत्व की कामना की गई है। हमारी संस्कृति संस्कृत भाषा में संरक्षित है। भारतीय संस्कृति को समझने के लिए संस्कृत भाषा का विकास एवं प्रचार-प्रसार आवश्यक है।

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