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स्मृति-शेष:कालाजार पर शोध के लिए डॉ. मोहन मिश्र को 2014 में दिया गया था पद्मश्री

दरभंगाएक महीने पहले
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डॉ. मिश्र को पद्मश्री देते पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी (फाइल फोटो)।  - Dainik Bhaskar
डॉ. मिश्र को पद्मश्री देते पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी (फाइल फोटो)। 
  • डॉ. मानस बिहारी वर्मा के बाद डॉ. मोहन मिश्र के निधन से मिथिलावासी मर्माहत, मूलत: मधुबनी जिले के कोइलख गांव के रहने वाले थे डॉ. मिश्र

चिकित्सा क्षेत्र के हस्ती, समाजसेवी, मिथिला-मैथिली आंदोलन के प्रखर प्रहरी पद्मश्री डॉ. मोहन मिश्र के निधन से मिथिलावासी आहत हैं। पद्मश्री डॉ. मानस बिहारी वर्मा के बाद पद्मश्री डॉ. मोहन मिश्र के निधन ने मिथिला को झकझोर कर रख दिया है। डॉ. मिश्र इंग्लैंड से एमआरसीपी किया था।फंगी जोन दवा के डोज एडजस्ट किया जिससे कालाजार का उन्मूलन मिथिला समेत बिहार में हुआ। इसके लिए इन्हें चिकित्सा के क्षेत्र में अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान मिला। जल के आर्सेनिक के मुक्ति के लिए अपने पुत्र ई. नरोत्तम मिश्रा के संग फिटकरी से शुद्ध करने का उपाय सुझाए।

इन्होंने कई पुस्तकों का लेखन एवं प्रकाशन कराया जो अमरीका में छपा था। राजनीतिक व सामाजिक कार्य में उनका अहम योगदान रहा। डॉक्टर साहेब भाजपा में गये और प्रदेश उपाध्यक्ष बने। वे प्रसिद्ध राजनेता पं. हरिनाथ मिश्र एवं प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. भावनाथ मिश्र के भतीजा थे। मधुबनी जिला के कोइलख गांव इनकी जन्मभूमि थी। डॉ. मिश्र अपना संपूर्ण सेवा डीएमसीएच में दिए। वहीं से अवकाश ग्रहण कर लहेरियासराय के बंगाली टोला में अपना समय का सदुपयोग करने में लगे थे। वे पत्नी मंजुला मिश्रा, बेटी मातंगी व मुक्तकेशी तथा पुत्र नरोत्तम मिश्र व उद्भट मिश्र सहित भरे पूरे परिवार छोड़कर संसार से बिदा हुए।

1995 में डीएमसीएच से सेवानिवृत्त हुए थे डॉ. मिश्र
डॉ. मोहन मिश्र का जन्म 19 मई 1937 को मधुबनी जिले के कोइलख में हुआ था। अपनी चिकित्सा साख हासिल करने के बाद, डॉ. मिश्र ने 1962 में दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (डीएमसीएच) में एक रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर के रूप में अपना करियर शुरू किया। जहां वे 1995 तक जारी रहे। डीएमसीएच में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने एमआरसीपी को सुरक्षित करने के लिए 1970 में सब्बटीकल ब्रिटेन से लिया। 1979 में मिश्रा जनरल मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर बन गए। एफआरसीपी की एक और उच्च डिग्री 1984 में एडिनबर्ग से 1984 में प्राप्त की गई थी और दो साल बाद 1986 में, वह डीएमसीएच में जनरल मेडिसिन विभाग के हेड बने। उन्होंने 1988 में लंदन से एफआरसीपी भी हासिल किया। डीएमसीएच से डॉ. मिश्र 1995 में सेवानिवृत्त हुए।

विभिन्न पदों को किया सुशोभित
डॉ. मिश्र ने बिहार सरकार और भारत सरकार द्वारा स्थापित कालाजार पर दो विशेषज्ञ समितियों में सेवा की है। संघ लोक सेवा आयोग के विशेषज्ञ सदस्य रहे। उन्होंने असम विश्वविद्यालय, सिलचर और तमिल विश्वविद्यालय, तंजावुर की मास्टर डिग्री परीक्षाओं के लिए भारतीय चिकित्सा परिषद के निरीक्षक के रूप में भी काम किया।

कई पुरस्कार से किए गए थे सम्मानित
डॉ. मिश्र को डॉ. राजेंद्र प्रसाद ओरेशन अवार्ड मिला था। उन्हें भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर उनके साहित्यिक कार्यों के लिए दिल्ली प्रशासन ने सम्मानित किया। उनकी पुस्तक, इंडिया थ्रू एलियन आइज, ने 2012 में विशिंग शेल्फ अवार्ड जीता। केंद्र सरकार ने उन्हें 2014 में गणतंत्र दिवस के सम्मान में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया।

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