आराेप:शहर के आवारा पशुओं के लिए बनाई गई याेजना पैसे के अभाव में हो रही फेल

दरभंगाएक वर्ष पहले
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शहर की मुख्य सड़काें पर इन दिनों आवारा पशुओं का कब्जा हो गया है। नतीजा है कि राहगीरों का सड़काें पर चलना मुश्किल हो गया है। लोग कब आवारा पशुओं की जद में आकर चोटिल हो जाए कहना कठिन है। रात के अंधेरे में सड़क पर चलने वाले लोगों काे अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है। थोड़ा भी ध्यान भटकाता है तो दुर्घटना होने में देरी नहीं होती है। लोगों के सतर्कता बरतने के बाद भी आए दिन छोटी-छोटी घटनाएं होती ही रहती हैं। शुक्र है कि अब तक शहर में बड़ी दुर्घटना नहीं हुई है।

लेकिन इसकी आशंका हमेशा बनी रहती है। रात दिन यातायात को प्रभावित करने वाले पशुओं की ओर न तो जिला प्रशासन ध्यान दे रहा है और न ही नगर निगम ही समस्या के निदान के लिए कदम उठा रहा है। शहर के मोहल्लों में आवारा विचरण करने वाले पशुओं का बसेरा मुख्य सड़कों पर हो गया है। वीआईपी रोड, लहेरियासराय का कामर्शियल चौक, जीएन गंज, बेलवागंज, करमगंज, नाका नंबर 6, नाका नंबर 5 से लेकर मिर्जापुर आयकर चौराहा के अलावा बेंता, अल्लपट्‌टी, दोनार, रेलवे स्टेशन, कटहलबाड़ी आदि मोहल्लों से गुजरने वाली मुख्य सड़काें पर अधिक होता है। कई बार तो स्थिति ऐसी उत्पन्न हो जाती है कि लोगाें को वाहन रोककर पशुओं को भगाना पड़ता है। बरसात के आगमन के साथ ही शहर की कई सड़कों पर पशुओं का जमावड़ा अधिक हो गया है। 

आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए बनाई गई थी टीम, लेकिन चल नहीं सका अभियान
आवारा पशुओं के तांडव से दुखी होकर वार्ड पार्षदों ने समस्या के निदान के लिए कई बार निगम की बोर्ड की बैठकाें में आवाज बुलंद की। जिसका परिणाम हुआ कि नगर आयुक्त घनश्याम मीणा ने पिछले साल कार्यभार संभालते ही आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए 6 सदस्यों की  की टीम बनाई गई। पकड़े जाने वाले पशुओं को वारिस नहीं मिलने पर नीलाम करने की भी योजना तैयार की गई। लेकिन योजना में कई कमियां होने के कारण मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

निगम को आधी-अधूरी योजना के कारण आर्थिक क्षति भी झेलनी पड़ी अलग से। नगर आयुक्त घनश्याम मीणा ने 8 अगस्त 2019 को स्वास्थ्य प्रभारी महेश्वर लाल दास के नेतृत्व में बनाई गई टीम में वद्यगृह निरीक्षक अमानुल्लाह खान के अलावा अनुदेशक संतोष राय , सुनील मंडल, राज किशोर पासवान, सुनील पासवान आदि को शामिल किया गया था। वार्ड पार्षदों को अपने क्षेत्र के आवारा पशुओं को पकड़कर निगम कर्मियों के हवाले करने को कहा गया था। पार्षदों ने पशुओं को पकड़ने के लिए दो से तीन बार अभियान भी चलाया गया।

लेकिन पशुओं को पकड़ कर रखने का काम सही तरीके नहीं होने के कारण बंद करना पड़ गया। पहली बार 16 पशुओं को गौशाला में एक महीना तक रखा गया था। गौशाला प्रबंधन ने पशुओं पर एक महीना खुराकी पर हुए खर्च का 75 हजार का बिल थमा दिया था। हालांकि निगम प्रशासन ने अब तक बिल का भुगतान नहीं किया। जबकि निगम प्रशासन ने पकड़ाने वाले आवारा पशुओं की नीलामी की योजना बनाई गई थी। जो एक बार भी नहीं हो सकी। तंग होकर निगम प्रशासन ने सभी पकड़े गए पशुओं को फिर से छोड़ दिया है।

  

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