आयोजन:संरक्षित खेती करने वाले प्रगतिशील किसानों को तकनीकी जानकारी दें : डॉ. एमएस कुंडू

दरभंगाएक महीने पहले
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जाले में कृषि सलाहकार समिति के कार्यक्रम का उद्घाटन करते अतिथि। - Dainik Bhaskar
जाले में कृषि सलाहकार समिति के कार्यक्रम का उद्घाटन करते अतिथि।
  • कृषि विज्ञान केंद्र की 13वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक में निदेशक प्रसार शिक्षा ने किया संबोधित

कृषि विज्ञान केंद्र की 13वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक प्रसार शिक्षा के निदेशक डॉ. एमएस कुंडू की अध्यक्षता में हुई। इसमें विगत वर्ष में कृषि विज्ञान केंद्र के द्वारा किए गए विभिन्न कार्यों की गहन समीक्षा की गई। आगे की कार्य योजना हेतु दिशा निर्देश दिया गया। अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. एमएस कुंडू ने बताया कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र के विकास के लिए इसके आधारभूत संरचना को सुदृढ़ किया गया है। कार्य बल उपलब्ध कराया गया है। इसके परिणाम स्वरूप कृषि विज्ञान केंद्र के परिक्षेत्र की उत्पादकता काफी बढ़ी है।  उन्होंने उद्यान वैज्ञानिक से दरभंगा में केला उत्पादन को गति देने की दिशा में विशेष प्रयास करने एवं संरक्षित खेती करने वाले प्रगतिशील किसानों को तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने एवं उन्नत तकनीकों का प्रत्यक्षण करने का निर्देश दिया। पशुपालन एवं अन्य वैकल्पिक फसलों के भी प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। इस अवसर पर आत्मा के परियोजना निदेशक पीएन झा ने कहा कि आत्मा दरभंगा कृषि विज्ञान केंद्र को हर तरह के सहयोग के लिए तत्पर है। जिससे दोनों ही संस्था अधिक से अधिक किसानों को सरकार की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित कर सके। विगत वर्षों में आत्मा के द्वारा कई कार्यक्रमों के लिए कृषि विज्ञान केंद्र को आर्थिक मदद दी गई है। आगे भी संस्थागत विकास के लिए धन उपलब्ध कराया जाएगा।

समीक्षा बैठक में अपना विचार देते हुए नाबार्ड की डीडीएम आकांक्षा ने बताया कि प्रगतिशील युवा कृषक नाबार्ड के सहयोग से कृषि से जुड़े हुए संरचना निर्माण एवं प्रसंस्करण के लिए आर्थिक लाभ बैंक से प्राप्त कर सकते हैं। नाबार्ड संपोषित पांच एफपीओ के किसानों को भी विगत 2 वर्षों से कृषि विज्ञान केंद्र के सीएफएलडी योजना द्वारा तकनीकी हस्तांतरण किया गया है। उन्हें अधिक प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है। प्रगतिशील कृषक भोला प्रसाद सिंह ने कृषक उत्पादों के विपणन में आ रही समस्या के क्षेत्र में कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। वही संरक्षित खेती में अग्रणी कृषक दीपक चौधरी ने विभिन्न फसलों के गुणवत्ता युक्त बीज पौधे एवं संरक्षित खेती पर प्रशिक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।

जैविक खेती-बारी के विस्तार में सहयोग एवं तकनीकी जानकारी की आवश्यकता पर बल
प्रगतिशील कृषक मुकेश कुमार ने जैविक खेती के विस्तार में सहयोग एवं तकनीकी जानकारी की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में शामिल हुए प्रगतिशील कृषक धीरेंद्र कुमार ने मखाना प्रसंस्करण पर प्रशिक्षण आयोजन करने की आवश्यकता पर बल दिया। वही उप निदेशक प्रसार शिक्षा डॉक्टर अनुपमा कुमारी ने विभिन्न प्रत्यक्षण के आर्थिक आकलन एवं प्रक्षेत्र दिवसों की संख्या को बढ़ाने पर बल दिया। इन प्रदर्शनों का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचे प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए डॉक्टर दिव्यांशु शेखर ने बताया कि इस वर्ष कोरोना बाढ़ एवं अतिवृष्टि की चुनौती का सामना करते हुए भी कृषि विज्ञान केंद्र ने लगभग 14000 किसानों को विभिन्न योजनाओं का लाभ पहुंचाया है।

वही जल जीवन हरियाली योजना अंतर्गत जलवायु अनुकूल खेती परियोजना में चयनित 5 गांव में 600 एकड़ से अधिक क्षेत्र में उन्नत खेती के तकनीकों का प्रत्यक्षण किया है। इस अवधि में अपने लक्ष्य से लगभग 30 प्रतिशत अधिक गुणवत्ता युक्त बीज का उत्पादन कृषि विज्ञान केंद्र में किया गया है। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर आरपी प्रसाद ने किया। टीवीओ जाले दिलीप कुमार, जीविका के विपिन कुमार, वन विभाग के पदाधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र सीतामढ़ी के पशुपालन वैज्ञानिक डॉक्टर किंकर समेत कृषि विज्ञान केंद्र जाले के डॉ. एपी राकेश, डॉ. सीमा प्रधान, अंबा कुमारी, डॉ. चंदन, संजीव, अमन, जैन समेत सभी कर्मी मौजूद थे।

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