पंडित गोपीनाथ झा ने कहा:श्रीकृष्ण ने पर्यावरण की रक्षा का संदेश दिया

दरभंगाएक महीने पहले
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परंपरा से आ रहे कोई रीति-रिवाज को समय के मुताबिक कैसे उसे निडर होकर परिवर्तित किया जाता है, इसकी शिक्षा गोवर्धन पूजा के दौरान श्रीकृष्ण ने मानव समाज को दी। यह काम बहुत कठिन है। लेकिन, अगर समाज के लोगों को अपनी बुद्धि क्षमता के साथ जोड़कर उसके सही परिणाम तक पहुंचाने की शक्ति रखने वाले व्यक्ति ही ऐसी परिस्थिति को बदलने में कामयाब हो सकते हैं।

ये बातें गोरीय परिवार गौरालय में शुक्रवार को गोवर्धन पूजा के दौरान व्यास पंडित गोपीनाथ झा ने कही। गोवर्धन पूजा के दौरान भक्तों ने 56 भोग लगाए। इस दौरान पं. झा ने कहा कि इस लीला के बहाने श्रीकृष्ण ने भागवत जनों की महत्ता को स्थापित किया है। श्रीकृष्ण ने इस संदर्भ को श्रीमद्भागवत कथा के 11वें स्कंध में श्री उद्धव जी से कहा है कि भगवान के भक्त देवता, ऋषि, पितर आदि किसी के ऋणी या सेवक नहीं रह जाते।

इस बात को समझने में देवताओं के राजा इंद्र को थोड़ा समय लगा। मौके पर आयोजित भजन में पंडित गुणानंद चौधरी सुधीर कुमार झा रमणजी सुरेश यादव कृष्णानंद झा, डॉ. संजीव कुमार झा, मिथिलेश कुमार झा, अनंत कुमार झा, पूर्व मुखिया प्रवीण कुमार झा, कपिलेश्वर ठाकुर आदि कई लोग मौजूद थे।

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