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घाल-मेल:बोर्ड की बैठक में पारित योजनाओं पर नहीं होता काम, तालाबों के सौंदर्यीकरण का उड़ रहा माखौल

दरभंगा18 दिन पहले
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  • नाला निर्माण की योजना की लागत 3 गुणा तक बढ़ी, लेकिन शहरवासियों को नहीं मिल पाया लाभ

नगर निगम के साल 2021-22 के वित्तीय बजट का प्रारूप को स्टैंंडिग कमेटी के सदस्यों ने कई संशोधनों के साथ पास कर दिया है। प्रस्तावित बजट बोर्ड की स्वीकृति के बाद पास होना भी लगभग तय है। बजट में कई ऐसी कार्ययोजनाओं को शामिल किया गया है जो कई वर्षों से बजट में जगह पाने में तो कामयाब होती है। लेकिन धरातल पर उतर नहीं पाई है। हर साल इन कार्ययोजनाओं के लिए आवंटित राशि में इजाफा जरूर कर दिया जाता है। इसमें नाला निर्माण से लेकर तालाब सौदर्यीकरण और आधुनिक शवदाहगृह तक शामिल है। जिसका सीधा जुड़ाव आमजन से है। नाला निर्माण कार्य की गति धीमी होने से शहर वासियों को जलजमाव की समस्या से जूझना पड़ता है। तालाबों के सौदर्यीकरण एवं सफाई के अभाव में तालाब के निकट के मोहल्लेवासियों को गंदगी एवं मच्छर के प्रकोप का सामना करना पड़ता है। कचरा प्रबंधन के लिए अबतक ठोस उपाय नहीं होने के कारण बरसात के समय मोहल्लों से कचरा का उठाव बाधित रहता है। जिसका सारा दंश लोगाें को ही सहना पड़ता है। हालांकि पिछले कुछ दिनों से शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार नजर आया है। लेकिन अब भी इसमें बड़े पैमाने पर सुधार की आवश्यकता लोगाें को महसूस हो रही है। तालाब सौदर्यीकरण योजना की बात पिछले 6-7 सालों से की जाती है। लेकिन तालाबों की स्थिति जस का तस बनी हुई है।

तालाबों के सौदर्यीकरण पर इस बार 5 करोड़ का बजट

शहर के 5 प्रमुख तालाबों की सौदर्यीकरण योजना के लिए इस बार भी बजट में 5 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। इसके अलावा बागमती रिवर फ्रंट योजना के लिए 11 करोड़ रुपए का उपबंध किया गया है। जबकि इन योजनाओं को पहले भी बजट में शामिल किया गया था। जिस पर कार्य नहीं किया गया। इस बार के बजट में एक बार फिर से इन योजनाओं को शामिल करने से उम्मीद जगी है। लेकिन इस बार भी इन योजनाओं पर काम हो पाएगा या नहीं, यह संशय भी बरकरार है। वहीं जल जीवन हरियाली योजना के तहत शहर के तालाबों की उड़ाही एवं पौधरोपण के लिए भी बजट में 10 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

स्मार्ट वार्ड योजना पर 2 करोड़ रु. खर्च करने के लिए होता है आवंटित

जबकि 2020-21 के बजट में सम्राट अशोक भवन की राशि 10 लाख से बढ़कर 2 करोड़ हो गई है। लेकिन काम अभी होना बाकी है। इसी प्रकार कमला पुस्तकालय के जीर्णोद्धार के लिए हर साल राशि आवंटित कर दी जाती है लेकिन काम अभी तक शुरू नहीं हुआ है। इसी तरह दो मलीन बस्ती वाले वार्डोंं का चयन करके स्मार्ट वार्ड योजना पर 2 करोड़ रुपए खर्च करने के लिए आवंटित किए जाते हैं। इस बार भी किए गए हैं। जिसे बोर्ड की मीटिंग में पास होने की उम्मीद है।

नाला निर्माण की योजना समय पर नहीं हुई पूरी, अब लागत 3 गुणा बढ़ी | शहर की जल निकासी के लिए 100 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले 5 बड़े नाला निर्माण का कार्य पिछले 10 साल से कछुआ चाल से चल रहा है। इसमें दोनार चौक से टिनही पुल तक नाला निर्माण का कार्य हर थोड़े दिनों बाद चालू तो होता है। कुछ दूरी तय करने के बाद बंद हो जाता है। इस योजना की शुरूआती लागत करीब 9 करोड़ थी जो अब बढ़कर करीब 27 करोड़ रुपए हो गई है। इसी प्रकार दो बड़े नाला निर्माण का कार्य इस लिए रुका हुआ है कि नाला की जमीन का अधिग्रहण नहीं हो पाया है या अतिक्रमण खाली कराने में प्रशासन नाकाम है।

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