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नमाज:मस्जिद में थी पाबंदी, घरों से अदा हुई अलविदा जुमा की नमाज

दरभंगाएक महीने पहले
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  • बड़ों के साथ बच्चों ने भी मांगी दुआ, कोरोना महामारी से मिले निजात, देश में हो खुशहाली

माहे रमजान के 24वें रोजे के दिन अलविदा जुमा की नमाज लोगों ने शुक्रवार को घरों से अदा की। इस अवसर पर उदास चेहरे और हम आंखों लिए रोजेदारों ने कोरोना से निजात की दुआ मांगी। कोरोना संक्रमण के दूसरे लहर से बढ़ते नुकसान के मद्देनजर सरकार द्वारा जारी लॉकडाउन के कारण सभी मस्जिदों व धार्मिक स्थल पर आम लोगों के प्रवेश और इबादत की मनाही होने से इस साल भी रोजेदारों को निराशा हाथ लगी। मालूम हो कि पिछले साल भी इसी तरह के हालात थे और लोगों ने अलविदा जुमा और ईद की नमाज घरों से ही अदा की थी। आज सुबह से लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। लोग एक दूसरे से मालूम कर रहे थे कि मस्जिद में नमाज की इजाज़त है या नहीं। मस्जिदों में या तो ताले लटक रहे थे या दरवाजे पर खादिम खड़े होकर लोगों से घर पर नमाज अदा करने की अपील कर रहे थे। कई जगह नमाजी और प्रबंधन के बीच मामूली बहस होते भी देखा गया।
अल्लाह माफ कर दे, हमारे देश में खुशहाली लौटा दे | ऐ अल्लाह, हम सबको माफ कर दे, इस कोरोना महामारी को खत्म कर दे, पूरी दुनिया को इससे निजात दे, हमारी जान बख्श दे, गरीब मजदूर भूखे मर जाएंगे। अल्लाह माफ कर दे। हमारे देश में खुशहाली लौटा दे, आमीन।

हम सब गुनाहगार हैं, वरना तू नाराज नहीं होता
मालूम हो कि शासनिक दिशा निर्देश के मुताबिक मस्जिदों में केवल इमाम, मोअज़्ज़िन, खादिम, प्रबंधन कमिटी के अलावा किसी को भी प्रवेश की अनुमति नहीं है। जिसके कारण घर-घर को आज मस्जिद बनते देखा गया, मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र के हर घर से नमाज और दुआ की सदा सुनाई दी। खासकर बच्चों में जो उमंग अलविदा जुमा को लेकर रहती थी वो बिल्कुल भी नहीं देखी गई। उनमें बहुत मायूसी देखी गई। बच्चे दहशत में दिखे और कोरोना से बचाव को लेकर सजग व चिंतित भी। कई घरों में बच्चों ने बड़ों के साथ जुमा की नमाज़ अदा की और रो-रो कर दुआ मांगी कि ऐ अल्लाह, अब बस करो, हमें माफ कर दो।

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