पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

भागवत कथा की शुरुआत:जहां संसार की शक्ति खत्म होती है, वहां दैविक शक्ति शुरू होती है, भगवान की लीलाओं में रमना चाहिए- चंचला चैतन्य

सिंहवाड़ा4 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • भागवत कथा की शुरुआत भागवत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थान के साथ की गई

बाबा बटेश्वर नाथ धाम सिंहवाड़ा में गणेश पूजा समिति के तत्वाधान में आयोजित संगीतमय श्रीमद भागवत कथा में दूसरे दिन रविवार को कथा वाचिका सुश्री चंचला चैत्यन गौड़ जी ने अमर कथा व शुकदेव जी के जन्म का वृतांत विस्तार से वर्णन किया। कथा के द्वितीय दिवस पर भक्तों ने महाराज जी के श्रीमुख से कथा का श्रवण किया। भागवत कथा की शुरुआत भागवत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थान के साथ की गई।

उन्होंने ने कहा कि इस समय पूरा विश्व त्रासदी से गुजर रहा है। कई प्रकार की कठिनाई का लोग सामना कर रहे हैं। उनमे से एक कोरोना भी है। इसके चलते पूरे विश्व में कई परिवारों ने ना भूलने वाला दर्द सहा है। उन्होंने आगे कहा कि जहां संसार की शक्ति समाप्त होती है वहां से दैविक शक्ति प्रारंभ होती है। महाराज श्री ने कहा कि धर्म किसे कहते है ? जो किसी भी स्थिति में बाधित न होता हो,जिसका ना आदि, न मध्य, न अंत जो तीनों कालों में रहे वह धर्म है। बाकि का कोई धर्म नहीं हो सकता। जब संसार में प्रलय होती है तब भी सनातन रहता है। जो कभी बाधित नहीं होता वह धर्म है। भगवान को अपना परिवार मानकर उनकी लीलाओं में रमना चाहिए।

खबरें और भी हैं...