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तस्करी:भारत-नेपाल बॉर्डर सील रहने के बावजूद लाेेगाें का आना-जाना जारी है, शराब की भी तस्करी होती है

हरलाखी8 महीने पहले
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  • एसएसबी के कंपनी इंचार्ज ने कहा : खुली सीमा होने के कारण आते हैं लोग, जांच कर कार्रवाई की जाएगी

कोरोना माहमारी को लेकर जब लॉकडाउन की घोषणा हुई उसी समय से भारत नेपाल सीमा को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। इसके बावजूद पिपरौन बॉर्डर पर तस्करी के संदिग्ध रास्तों से अवैध प्रवेश हो रहा है। हर रोज काफी संख्या में नेपाल से लोग भारतीय बाजारों में बेरोकटोक तरीके से पहुंच जाते हैं। जिससे कोरोना संक्रमण के फैलने का खतरा बढ़ सकता है। दिघीया टोला व बॉर्डर पीलर संख्या 285/7 के निकट संदिग्ध रास्तों से नदी में ट्युव के नाव से पैसे लेकर अवैध प्रवेश कराए जाते हैं। इस रास्ते से तस्करी की गतिविधियां भी हो रही है। इन रास्तों में एसएसबी की नाका गश्ती नहीं होती है। जिससे इन संदिग्ध रास्तों से खाद्य पदार्थों के अलावा जैविक खाद, गुटखा, काली मिर्च, सुपारी, सरसों तेल, नशीली दवा व शराब की तस्करी भी भारी मात्रा में हो रही है।

इंडो-नेपाल बॉर्डर के पिपरौन-जटही मुख्य मार्ग के चेकपोस्ट पर एसएसबी की 24 घंटे नाका गश्ती होती है। जिससे इनदिनों तस्कर व अवैध प्रवेश करने वाले लोग उक्त संदिग्ध रास्तों से आवागमन कर रहे हैं। इन रास्तों से प्रतिबंधित सामानों की तस्करी भारी मात्रा में हो रही है। नदी में पानी उफन जाने के बावजूद टयूब के नाव पर खतरों के साथ आवागमन व तस्करी हो रही है। इस बाबत पिपरौन एसएसबी कंपनी इंचार्ज रमन कुमार ने बताया कि स्ट्रेंथ की कमी और खुली सीमा होने के कारण परेशानी हो रही है। जिन रास्तों से अवैध प्रवेश हो रहे हैं जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

इधर, 60 किमी की दूरी तय करने के लिए खर्च करने पड़ रहे तीन से पांच हजार रुपए

समस्तीपुर मंडल के समस्तीपुर-दरभंगा रेलखंड के मध्य हायाघाट और थलवाड़ा के बीच रेल पुल संख्या 16 के गर्डर तक बाढ़ का पानी आ जाने के कारण रेल खंड पर विगत पांच दिनों से रेल परिचालन ठप है। परिचालन बाधित होने के कारण समस्तीपुर से जयनगर आने वाली ट्रेनों का परिचालन बाधित हो गया है। परिचालन बाधित होने व लॉकडाउन में ट्रेन से यात्रा करने वाले यात्रियों को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। मधुबनी व जयनगर से खुलने वाली सभी ट्रेनों का आंशिक समापन व प्रारंभ समस्तीपुर जंक्शन से कर दिया गया है।

जिसके कारण यात्री को समस्तीपुर से निजी वाहन करके मधुबनी व जयनगर पहुंचना पड़ रहा है। दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों से यात्री पांच सौ से छह सौ रुपए खर्च कर समस्तीपुर पहुंच रहें हैं। वही समस्तीपुर से घर पहुंचने के लिए तीन हजार से पांच हजार रुपए खर्च करना पड़ रहा है। 12 सौ किमी की यात्रा करने में रेल यात्रियों को पांच से छह सौ रुपए खर्च हो रहा है। वही समस्तीपुर से मधुबनी या जिले के अन्य प्रखंडो तक पहुंचने के लिए (60 से 70 किमी) तीन से पांच हजार रुपए खर्च करना पड़ रहा है।

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