शारदीय नवरात्र:सकरपुरा स्थित दुर्गा मंदिर में होती है माता के वैष्णवी रूप की पूजा, खोइंछा भरने 8 गांवों से आती हैं महिलाएं

हसनपुर12 दिन पहले
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हसनपुर : सकरपुरा दुर्गा मंदिर परिसर में भव्य पंडाल का किया जा रहा है निर्माण। - Dainik Bhaskar
हसनपुर : सकरपुरा दुर्गा मंदिर परिसर में भव्य पंडाल का किया जा रहा है निर्माण।
  • लोगों में है विश्वास, यहां आने वाले श्रद्धालुओं की हर मन्नतें होती हैं पूरी, नवरात्र में दर्शन को उमड़ती है भीड़

ऐसे तो आस्था की भावना में सालों भर सभी देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना श्रद्धा व उल्लास के साथ की जाती है। लेकिन शारदीय नवरात्र में मुख्य तौर पर महादुर्गा की पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का उल्लास देखते ही बनता है। नवरात्र में सभी दुर्गा मंदिरों व पूजा पंडालों में भक्ति का माहौल बना रहता है। प्रखंड के सकरपुरा गांव स्थित दुर्गा मंदिर वाली माता के दरबार में शारदीय नवरात्र में कुछ अलग ही नजारा देखने को मिलता है। इस मंदिर में माता के वैष्णवी रूप की पूजा होती है। पारिवारिक सुख-समृद्धि व मनोकामना पूरी होने के लिए क्षेत्र के कई गांवों से श्रद्धालुओं की भीड़ इस मंदिर परिसर में जुटती है।  इस मंदिर वाली माता की महिमा इतनी अगम अपार है कि, इनकी कृपा से क्षेत्र के कई घरों में चिराग जले हैं। श्रद्धालुओं में माता के प्रति इतनी आस्था है कि, जिन्हें संतान की प्राप्ति नहीं होती है। वे माता के दरबार में कृपा लेकर संतान रत्न को प्राप्त करते हैं। क्षेत्र के लोगों में ऐसा विश्वास है कि यहां आने वाले भक्तों की हर मन्नतें पूरी होती है।‌‌ बताया जाता है कि पिछले 60 सालों से शारदीय नवरात्र में इस मंदिर में माता दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश व कार्तिकेय के मिट्टी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाती है। पट खुलने के साथ ही उमड़ती है भक्तों की भीड़| बताया जाता है कि सकरपुरा गांव स्थित दुर्गा मंदिर में स्थापित किए जाने वाले मां दुर्गा की प्रतिमा की महिमा इतनी विख्यात है कि क्षेत्र के 8 गांवों की महिलाएं अपनी मुरादें लेकर खोंइछा भरने के लिए इस मंदिर तक पहुंचती हैं। जागरण की रात माता के पट खुलने के साथ ही खोंइछा भरने के लिए महिला श्रद्धालुओं का तांता लगने लगता है। खासकर नवमीं व दसवीं के दिन श्रद्धालुओं की भीड़ और अधिक जुटती है। ऐसा माना जाता है कि यहां की माता मनोकामनादायी है। अपनी मुरादें लेकर माता के दरबार में पहुंचने वाले भक्त खाली हाथ नहीं लौटते हैं। जागरण के बाद हे ही मंदिर में माता की प्रतिमा के सामने ढोल व बाजे के साथ फूल चढ़ाने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाती है। भक्त अपनी मन्नतें लेकर माता के चरण पर फूल रखकर आराधना करते हैं।

कलश शोभा यात्रा के साथ की गई नवरात्र पर कलश की स्थापना

गाजे-बाजे के साथ शोभा कलश यात्रा के साथ ही नवरात्रा के अवसर पर कलश स्थापना की गई। प्रखंड क्षेत्र एवं आसपास के इलाकों का वातावरण भक्ति मय बना रहा। प्रखंड के पटेल नगर बेला चौक स्थित दुर्गा मंदिर के प्रांगण से 151 कन्याओं, महिलाओं, पुरूषों द्वारा गुरुवार को शोभा कलश यात्रा निकाली गई। इस अवसर पर समिति के सदस्यों के द्वारा शिव मंदिर के पास गंगाजल मिला हुआ जल प्रत्येक ब्रतियों के कलश में भरने के उपरांत शोभा कलश यात्रा पूरे बेला, चित्तौड़ा, भानपुर,दसौत पट्टी घुमाते हुए दुर्गा मंदिर के प्रांगण में विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ ही कलश पूजन एवं कलश स्थापना की गई।

पंडित राम सरयुग दास ने वर्तियों को बताया कि प्रत्येक दिन सुबह में कलश पूजन एवं मां दुर्गा की आरती की जाएगी जिसमें सभी श्रद्धालुओं को भाग लेना होगा। नवरात्र के अवसर पर प्रखंड के विभिन्न दुर्गा मंदिर एवं घरों में भी कलश स्थापना किया गया। पूरे प्रखंड का वातावरण भक्ति में बना हुआ है। मौके पर दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष राम शंकर सिंह, सचिव राम सगुन मंडल, कोषाध्यक्ष बिपिन बिहारी प्रसाद, रामाकांत मंडल, रामकरण मंडल, शंकर कुमार शिक्षक, देवेश कुमार सिंह, गंगाराम मंडल शिक्षक,गंगा मंडल शिक्षक, हेमंत कुमार, विजय कुमार सिंह, अरविंद कुमार सिंह सहित ग्रामीणों का योगदान सराहनीय रहा।

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