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जाेखिम में लाेगाें की जान:प्रखंड स्तर पर अग्निशमन दस्ता वाहन की जनहित में लोगों ने की मांग, आग से हाेने वाले नुकसान से बचा जा सकता है

खजौली11 दिन पहले
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  • सुदूर इलाका में अगलगी से निपटने के लिए ठोस पहल नहीं की गई, अनहोनी का रहता डर

माैसम के बदलाव के साथ तेज गति से हवा चलने के कारण जिला भर के विभिन्न प्रखंड में लगातार अगलगी की घटना हो रही है। लेकिन सरकार के द्वारा लाखा दावा के बावजूद भी धरातल पर अगलगी जैसे घटना से सुदूर इलाका में निपटने के लिए आजादी के सात दशक गुजर जाने के बावजूद भी ठोस पहल अभी तक नहीं की गई है।

स्थिति यह है कि अगर प्रखंड क्षेत्र के किसी सुदूर ग्रामीण जैसे इलाका में अगलगी जैसे घटना घटित हो और अग्निशमन वाहन को आग पर काबू पाने के लिए सूचना के बावजूद घटना स्थल पर पहुंचने से पहले घटना स्थल पर आगजनी से सब कुछ जलकर स्वाहा होना लाजमी है। मालूम हो कि प्रखंड मुख्यालय से जिला मुख्यालय की तकरीबन 30 किलोमीटर दूरी है। अगर स्थिति में प्रखंड क्षेत्र के किसी भी पंचायत के किसी सुदूर ग्रामीण इलाका में अगर अगलगी जैसे अनहोनी घटना घटित होती है। उस स्थिति में सूचना के बावजूद घटना स्थल पर संकीर्ण सड़क से अग्निशमन दमकल वाहन पहुंचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।

घटना स्थल पर अग्निशमन दमकल वाहन तब ही पहुंचेगी जब सब कुछ राख हो जाएगा। जबकि एक तरफ सरकार अगलगी की घटना से बचाव के नाम पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए खर्च करती है। वहीं धरातल पर सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के सघन आबादी के लोग भगवान भरोसे ही रह रहे हैं। ऐसी स्थिति जनहित में लोगों की मांग उठ रही है कि अनुमंडल मुख्यालय के साथ-साथ स्थानीय प्रखंड व अंचल स्तर पर अग्निशमन दमकल वाहन की उपलब्धता होने पर किसी बड़ी घटना घटने से समय पर रोका जा सकता है। और इस से होने वाली लाखों की क्षति से बचाया जा सकता है।

वहीं भकुआ गांव निवासी समाजसेवी अमरेश कुमार सिंह कहते हैं कि प्रखंड मुख्यालय से जिला मुख्यालय की दूरी करीब 30 किलोमीटर है। जबकि प्रखंड मुख्यालय से भकुआ की दूरी करीब 20 किलोमीटर है। ऐसी स्थित यदि अगलगी जैसी यहां घटना घटित हुआ तो अग्निशमन वाहन पहुंचने से पहले ही सब कुछ जलकर राख हो जाएगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर कम से कम एक अग्निशमन वाहन की उपलब्धता हो। वहीं दतुआर गांव निवासी ने कहा कि मौसम के बदलाव के साथ जिला के प्रत्येक प्रखंड मुख्यालय पर एक अग्निशमन वाहन होना चाहिए। मरुकिया गांव निवासी संतोष कुमार सज्जन ने कहा कि अगलगी से बचाव के लिए सरकार की तरफ से प्रत्येक वर्ष करोड़ों खर्च किया जाता है।

लेकिन स्थानीय स्तर पर अग्निशमन वाहन नहीं रहने के कारण वाहन पहुंचने से पहले सब कुछ जलकर खाक हो जाता है। वहीं इनरबा निवासी कहा कि सरकार को प्रत्येक प्रखंड में एक अग्निशमन दमकल वाहन की उपलब्धता निश्चित रूप से करना चाहिए। क्योंकि घटना घटित होने पर समय रहते किसी बड़ी क्षति से बचाया जा सके।

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