काम की खबर:बाढ़ से हुई क्षति के अनुदान को ले 7 से 22 तक करें आवेदन

मधेपुराएक महीने पहले
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किसान चौपाल में उपस्थित किसान व अधिकारी। - Dainik Bhaskar
किसान चौपाल में उपस्थित किसान व अधिकारी।
  • जिला कृषि पदाधिकारी बोले- पीड़ित किसानों को 46.46 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाएगा
  • जिले के 3 प्रखंडों में बर्बाद हुई थी खेतीबाड़ी

जिले में बाढ़ और अत्यधिक वर्षा से प्रभावित किसानों के लिए खुशखबरी है। पीड़ित किसान कृषि इनपुट अनुदान का लाभ लेने के लिए 07 नवंबर से आवेदन जमा कर सकते हैं। फसल क्षति का आवेदन 22 नवंबर तक जमा किया जाएगा। आवेदन जमा करने के बाद किसानों को अनुदान योजना की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके खाते में सरकार के द्वारा भेजी जाएगी। ये जानकारी जिला कृषि पदाधिकारी राजन बालन ने दी। डीएओ ने बताया कि गुरुवार को कृषि विभाग के सचिव डॉ. एन सरवन कुमार ने कृषि पदाधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठक कर यह निर्देश जारी किया है कि आवेदन जमा कराने के लिए प्रचार-प्रसार करने का निर्देश प्रखंड और पंचायत के सभी अफसरों और कर्मचारियों को दें। बता दें कि जिले में अगस्त माह के दौरान आई बाढ़ और अत्यधिक वर्षा के कारण तीन प्रखंड के 30 पंचायत के 11537 हेक्टेयर में लगी फसल प्रभावित हुई थी।

आंकड़े निम्न है
प्रखंड का नाम पंचायत प्रभावित रकवा
आलमनगर 14 56.27 हेक्टेयर
चौसा 13 50.78 हेक्टेयर
पुरैनी 03 832 हेक्टेयर

बाढ़ व अतिवृष्टि से 3 प्रखंड के 30 पंचायत हुई प्रभावित
डीएओ ने बताया कि जिले में बाढ़ और अतिवृष्टि से आलमनगर, चौसा तथा पुरैनी प्रखंड के तीस पंचायत प्रभावित हुई थी। पीड़ित किसानों को 46.46 करोड़ का अनुदान दिया जाएगा। किसानों से अपील की गयी है कि वे कृषि विभाग के पोर्टल पर जल्द से जल्द आवेदन जमा कर अनुदान का लाभ लें।

जीरो टिलेज विधि से खेती से उपजेगा अधिक अनाज : अजय

शंकरपुर | जिरवा मधेली पंचायत के मधेली स्थित पंचायत सरकार भवन में विभागीय निर्देशानुसार किसान चौपाल का आयोजन किया गया। किसान चौपाल में उपस्थित किसानों को कृषि से संबंधित तमाम जानकारी दी गई। साथ ही किसानों की आमदनी बढ़ाने के उपायों पर भी विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। प्रखंड उद्यान पदाधिकारी अजय कुमार ने इस दौरान किसानों को जीरो टिलेज पद्धति से खेती करने को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जीरो टिलेज के माध्यम से खेती करने में खेतों में बीज रोपण करने के लिए जहां जुताई की आवश्यकता नहीं पड़ती है। वहीं फसल का उत्पादन भी अधिक होता है। लिहाजा कम खर्च में किसानों को अधिक मुनाफा होता है। किसान चौपाल में सिंचाई योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, पौधा संरक्षण, कृषि यांत्रिकीकरण, जैविक खेती, मिट्टी जांच, समेकित खेती कौशल विकास, क्षेत्र के जलवायु के अनुसार फसलों का चयन आदि पर भी गहन रूप से चर्चा की गई। इसके अलावा किसान चौपाल में किसानों को कृषि विभाग द्वारा संचालित श्रीविधि, जैविक खाद, पशुपालन, बीज ग्राम, बागवानी सहित अन्य विभिन्न योजनाओं की भी विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।

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