विधानसभा चुनाव में मोमबत्ती 29 रुपए, अब 9 रुपए में:पंचायत चुनाव ने खोली असेम्बली इलेक्शन में धांधली की पोल, झाड़ू तक में हुई लूट

मधेपुराएक दिन पहले
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बिहार के मधेपुरा जिले में विधानसभा चुनाव से लेकर पंचायत चुनाव के बीच सामान की आपूर्ति के लिए होने वाले टेंडर में बड़ा झोल सामने आ रहा है। दरअसल, बिहार में विधानसभा चुनाव नवंबर 2020 में हुआ। अभी पंचायत चुनाव चल रहा है। महज एक साल में टेंडर में शामिल सामानों के दर 40 से 50 प्रतिशत तक घट गए है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है प्रशासनिक अधिकारी और सप्लायर की गठजोड़ के आधार पर चुनाव के दौरान कितने बड़े पैमाने पर सरकारी राशि का गोलमाल हुआ होगा।

अभी चल रहे पंचायत चुनाव में मतदान के दौरान जो सामग्री मतदान कर्मियों को उपलब्ध कराई जा रही है, वह टेंडर के मुताबिक सप्लाई की जाने वाले सामान के गुणवत्ता और मात्रा के अनुसार नहीं है। कई सामान इतनी कम मात्रा में आपूर्ति की जा रही है कि मतदान की प्रक्रिया शुरू होने के कुछ ही घंटे के बाद ही वह समाप्त हो जाती हैं। लिहाजा ग्रामीण क्षेत्रों में कर्मी गांव वालों के घर से ही कभी गोंद, कभी पिन आदि मंगवाकर काम चलाते हैं।

3 रुपये वाला मोमबत्ती ही किया सप्लाई

उदाहरण में बात करें तो टेंडर में सबसे कम मात्रा वाला सामान गोंद है। टेंडर के अनुसार, चुनाव में 60 ml का गोंद दिया गया है जिसका मूल्य 9 रुपया है। लेकिन स्पलाई 22 ml वाला गोंद किया गया है जिसका मुल्य 5 रुपया लिखा है। ऐसे में आप यह जान कर चौक जाएंगे कि यही गोंद विधानसभा चुनाव 2020 में 12 रुपया में सप्लाई किया गया था। विधानसभा चुनाव में जो मोमबत्ती 29 का था वो इस बार 9 रुपये का हो गया। लेकिन सप्लाई 3 रुपये वाला मोमबत्ती ही किया गया।

सामग्री कोषांग प्रभारी बोले- सामान जैसा आता है, वैसा ही इंट्री होता है

हैरत की बात यह है कि मतदान के दिन जिले भर के अधिकारियों का भ्रमण हाेता रहा, लेकिन किसी की नजर मतदान कर्मियों के पास टेबल पर रखे दोयम दर्जे के सामग्री पर नहीं पड़ी। उनकी नज़र इस चीज पर नहीं पड़ी की मतदान केंद्रों पर टेंडर के मुताबिक गुणवत्ता और संख्या में सामग्री सप्लाई नहीं हुए है। इस संबंध में NDC सह सामग्री कोषांग प्रभारी राजीव रंजन ने बताया कि टेंडर में क्या है, यह जानकारी सामग्री कोषांग में नहीं रहती है। यहां जो सामान जैसा आता है, उसका वैसा ही इंट्री होता है। उसी आधार पर रिपोर्ट की जाएगी।

अब तक किसी ने शिकायत नहीं दर्ज कराई

इधर, मधेपुरा के DPRO मनोहर साहू कहते है कि इस मामले में अब तक किसी ने शिकायत नहीं दर्ज कराई है। शिकायत दर्ज होने पर मामले की जांच कराई जाएगी। मतदान सामग्री, सामग्री कोषांग के तहत रखा और डिस्पैच किया जाता है।

8 चरणों का चुनाव संपन्न हो गया है

बता दें कि जिले में 10 चरणों में पंचायत चुनाव होने हैं। अभी 8 चरणों का चुनाव संपन्न हो गया है। मतदानकर्मियों को दी जाने वाले सामग्रियों की पड़ताल हमने कई चरणों में किया। मधेपुरा, गम्हरिया से लेकर मुरलीगंज तक के चुनाव में जो समान थे वे एक जैसे थे। गोंद, मार्कर की क्वालिटी, जैसे सामान अधिकांश जगहों पर ठीक नहीं थी। कुछ मतदान कर्मियों ने बताया कि एक दिन की तो बात है, हम लोगों को तो पता नहीं रहता है कि कौन सा सामान कितनी मात्रा और क्वालिटी का होना चाहिए। जो सामान मिलता है, उसका इस्तेमाल करते हैं। घटने पर खुद से खरीदते है या मैनेज कर लेते हैं। जानकारी के लिए बता दें कि विधानसभा चुनाव में इसी संख्या और गुणवत्ता के आधार पर गड़बड़ी करने वाले सप्लायर का करीब 6 करोड़ से अधिक का बिल काटा गया है।